पंजाब के पटियाला शहर के स्पोर्ट्स कॉलेज के कोच की मनमानी से परेशान होकर खुदकुशी करने वाली जिले की होनहार बेटी पूजा चौहान की मौत से उसके गांव में शोक की लहर है। पूजा की मौत के बाद गांव के हर शख्स की जुबां पर एक ही सवाल है कि क्या गरीबों की बेटियों को सपने देखने का हक नहीं है।
जिले के उमरी बेगमगंज थाना क्षेत्र के पूरे नौशहरा गांव के रहने वाले प्रभुनाथ चौहान अपने परिवार समेत पंजाब के पटियाला शहर में सब्जी की दुकान करते हैं। प्रभुनाथ चौहान की बेटी पूजा पटियाला के ही खालसा कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। पढ़ाई के साथ-साथ पूजा खेल में भी काफी तेज थी और हैंडबॉल की राष्टीय स्तर की खिलाड़ी थी।
पूजा के चाचा सूर्यभान का कहना है कि पटियाला के खालसा कॉलेज के प्रबंधन ने उसकी प्रतिभा को देखते हुए मुफ्त प्रवेश देने का झांसा दिया था। सूर्यभान का आरोप है कि एक वर्ष तो कॉलेज प्रशासन ने उसे हॉस्टल समेत अन्य सुविधाएं दीं, लेकिन इस वर्ष उसे प्रवेश देने से मना कर दिया था।
सूर्यभान का कहना है कि इसके लिए कॉलेज के लोग पूजा से फीस के रूप में 30 हजार रुपये की मांग करने लगे। जब उसके भाई प्रभुनाथ ने किसी तरह से रुपये की व्यवस्था कर फीस जमा कर दी तो कॉलेज के कोच ने उसे हॉस्टल देने से इनकार कर दिया।
पूजा के बार-बार हॉस्टल की मांग करने पर भी कोच उसे घर से आने जाने के लिए कहते रहे। कॉलेज घर से दूर होने व आर्थिक तंगी के चलते पूजा रोज आने जाने का किराया नहीं वहन कर सकती थी और कोच उसे लगातार परेशान कर रहा था।
इसी से परेशान होकर पूजा ने शनिवार को घर में फांसी लगाकर जान दे दी। मौत से पहले पूजा ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है जिसमे उसने कोच द्वारा प्रताड़ित करने की बात का विस्तार से जिक्र किया है।
रविवार को जब पूजा की मौत की खबर मिलते ही पूरा गांव सदमें में डूब गया। चचेरी बहन प्रमिला ने बताया कि पूजा काफी मिलनसार लड़की थी और जब भी गांव आती थी तो लोगोे से घुलमिल जाती थी।
सूर्यभान ने बताया कि पूजा तीन बहनें व एक भाई में दूसरे नबंर पर थी। पूजा की बड़ी बहन ममता पढ़ाई पूरी कर चुकी है, जबकि पूजा से छोटा भाई अजय व बहन दिव्या पटियाला में ही पढ़ रहे हैं। पूजा की मौत पर गांव में केवल एक ही सवाल है कि गरीब न होते तो शायद ऐसी घटना न होती और वह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनकर उभरती।