गोंडा। नजूल भूमि पर कब्जे और खरीद-फरोख्त रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू की है। डीएम प्रियंका निरंजन ने सरकारी नजूल भूमि का सत्यापन कर उसका ब्योरा रजिस्ट्री पोर्टल की निषिद्ध सूची में दर्ज कराने की योजना तैयार की है। इससे संबंधित भूमि का बैनामा नहीं हो सकेगा और सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने की कोशिश पर रोक लगेगी।
नगर पालिका गोंडा में करीब 43.77 लाख वर्गमीटर नजूल भूमि दर्ज है। अभिलेखों के अनुसार यहां 7,382 नजूल खाते हैं। इनमें 7,344 पट्टेदारों के पास करीब 26.46 लाख वर्गमीटर भूमि है। 38 खाते सार्वजनिक उपयोग से संबंधित हैं। इन खातों में करीब 17.32 लाख वर्गमीटर भूमि दर्ज है।
डीएम ने सीआरओ रिंकी जायसवाल की अध्यक्षता में टीम गठित की है। टीम नजूल भूमि के खातों, पट्टों और मौके की स्थिति का राजस्व अभिलेखों से मिलान करेगी। सत्यापन के बाद सार्वजनिक नजूल भूमि का ब्योरा रजिस्ट्री पोर्टल की निषिद्ध सूची में दर्ज कराया जाएगा, ताकि उसका पंजीकरण न हो सके।
जिले के तीन नगर निकायों में नजूल भूमि का अलग-अलग विवरण दर्ज है। गोंडा नगर पालिका में 43,77,709 वर्गमीटर, करनैलगंज में 3,99,244 वर्गमीटर और नवाबगंज में 1,10,990.66 वर्गमीटर नजूल भूमि है। करनैलगंज में 1,735 नजूल खाते हैं। इनमें 1,716 निजी पट्टेदारों और 19 सार्वजनिक उपयोग से संबंधित हैं। नवाबगंज में 170 खाते हैं, जिनमें 158 निजी, आठ अवैध और चार सार्वजनिक श्रेणी में दर्ज हैं। (संवाद)
अभिलेखों का हो रहा मिलान
सार्वजनिक नजूल भूमि के सत्यापन के लिए टीम गठित की गई है। टीम खातों, पट्टों और मौके की स्थिति का राजस्व अभिलेखों से मिलान करेगी। सत्यापन के बाद सार्वजनिक नजूल भूमि का ब्योरा रजिस्ट्री पोर्टल की निषिद्ध सूची में दर्ज कराया जाएगा। इससे रजिस्ट्री से पहले ही भूमि की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
- प्रियंका निरंजन, डीएम