गोंडा। मंडल मुख्यालय स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की स्थापना 1989 में युवा खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए हुई थी। निर्माण के समय ही कई कार्य अधूरे रह गए जो आज तक पूरे नहीं हो सके। 30 सालों से स्टेडियम उपेक्षा का शिकार है। चार साल पहले स्टेडियम की सेहत सुधारने के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया गया था। 40 लाख रुपये के प्रस्ताव में स्टेडियम की दुर्दशा को सुधारने के साथ ही कई कार्य प्रस्तावित थे। प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव फाइलों में ही कैद रह गया और दिनोंदिन स्टेडियम की स्थिति खराब होती जा रही है। अब तो स्टेडियम में एक भी खेल प्रतियोगिता के लिए कोई सुविधा नहीं है। अभावों के बीच एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं स्कूलों की ओर से होती हैं। स्टेडियम की ओर से कोई प्रतियोगिता नहीं हो पा रही है।
शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर उतरौला मार्ग पर स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम मौजूदा समय अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यहां खिलाड़ियों के लिए न तो जिम की व्यवस्था है और न ही अन्य संसाधन ही मौजूद हैं। साथ ही अधिकांश खेलों की बारीकियों को बताने के लिए सिर्फ दो प्रशिक्षक ही हैं। एक एथलेटिक्स व एक ताइक्वांडो का कोच हैं। स्टेडियम की चारदीवारी छोटी होने के कारण खेल मैदान भी नहीं सही है। स्टेडियम के अधिकांश हिस्से में जंगली घासें उगी हुई हैं। मुख्य मार्ग से स्टेडियम तक जाने वाला मार्ग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। यही कारण है कि खिलाड़ी स्टेडियम में जाने से कतराते हैं। स्टेडियम की दशा सुधारने के लिए सितंबर 2015 में 40 लाख रुपये का एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। यह प्रस्ताव अभी भी फाइलों में ही कैद है।
प्रस्ताव में शामिल थे ये कार्य
-पूरे स्टेडियम की चारदीवारी तीन फुट और ऊंची बनाई जाएगी।
-प्रकाश व्यवस्था सही होगी।
- खिलाड़ियों के लिए आधुनिक उपकरणों वाले मल्टी जिम की स्थापना।
- आउट डोर व इन डोर खेलों की व्यवस्था व खेल सामग्रियों की आपूर्ति।
- स्टेडियम की सफाई व आकर्षित बनाए जाने की व्यवस्था।
मैदान ऊबड़-खाबड़, ट्रैक ध्वस्त और चेंज रूम पर ताला
स्टेडियम की स्थिति यह है कि वर्ष 1989 में स्थापित होने के दौरान ही खेल मैदान समतल नहीं हुआ था। तब से एक तरफ ऊंचा और एक तरफ नीचा है। इससे एक तरफ पानी भर जाता है। बास्केट बाल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी का जाल, फुटबाल, विभिन्न खेलों के लिए बहुउद्देशीय हाल में बने स्थल जर्जर हो चुके हैं। ट्रैक ध्वस्त हैं, पवेलियन जर्जर हो गया है। इसके अलावा महिला खिलाड़ियों के लिए बने चेंज रूप पर अधिकारी का ताला लगा है। वह आते हैं वहां बैठते हैं, और समय ताला लगा रहता है। हॉस्टल तक की सुविधा नहीं है। अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवास की सुविधा नहीं है लेकिन वेतन से किराया काट लिया जा रहा है।
स्टेडियम को सुधारने के लिए हो रहा प्रयास
जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास किये जा रहे है। स्टेडियम की दीवार टूट जाने के कारण जंगली जानवर और मवेशी ग्राउंड के अंदर पहुंच जाते है। स्टेडियम की बाउंड्री निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे कुछ मिलता है काम कराया जायेगा। -चंचल मिश्रा, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
इनसेट
खिलाड़ियों को निखारने के हो रहा प्रयास
एथलेटिक्स में बालक और बालिका दोनों मिलाकर 35 खिलाड़ी है। जिसमें एक खिलाड़ी दो बार आल इंडिया खेल चुका है। और भी सभी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे है। खिलाड़ियों को सुविधाओं को लेकर कुछ परेशानियां रहती हैं जिसकी समस्या का निदान करने का प्रयास किया जा रहा है। -अशोक सोनकर, कोच