महिला अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता एक बार फिर उजागर हुई है। प्रसूता को भर्ती नहीं करने पर परिवारीजन उसे ठेले पर लादकर इलाज के लिए भटकते रहे। बाद में डीएम के निर्देश पर प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
नगर कोतवाली क्षेत्र के पुरैनिया तालाब मोहल्ला निवासी मोहम्मद शमी ने अपनी गर्भवती पत्नी फूलजहां (25) को तीन दिन पहले प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टर ने क्रिटिकल केस बताकर उसे बहराइच रेफर कर दिया था।
इस पर शमी ने पत्नी को बहराइच में भर्ती कराया। दो दिनों तक इलाज के बाद बहराइच जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने फूलजहां को फिर से बलरामपुर जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर बलरामपुर पहुंचने पर जिला महिला अस्पताल के डॉ. आरके सिंह ने भर्ती करने से इंकार कर दिया।
शमी का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के लिए पैसे मांगे गए मगर वह पैसे की व्यवस्था नहीं कर सका। इसके चलते फूलजहां को ठेले पर लादकर इलाज के लिए भटकता रहा। बाद में डीएम से मामले की शिकायत की। इस पर डीएम राम विशाल मिश्र ने जिला महिला अस्पताल की सीएमस को प्रसूता को तत्काल भर्ती कर इलाज करने का निर्देश दिया।
जिला महिला अस्पताल के डॉ. आरके सिंह ने बताया कि प्रसूता की हालत नाजुक थी इसीलिए उसे बहराइच रेफर किया था। बुधवार को परिवारीजन उसे फिर जिला महिला अस्पताल ले आए। प्रारंभिक जांच में नवजात की मौत स्पष्ट नहीं हो सकी है।
अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अस्पताल में भर्ती नहीं करने व पैसे मांगने का आरोप झूठा है। वहीं, अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि प्रसूता का इलाज किया जा रहा है। पैसे आदि मांगने का आरोप बेबुनियाद है।