हर बार की तरह इस बार भी जिले की छह लाख आबादी को उजाले का पर्व यानि
दीपावली का त्योहार अंधेरे में मनाना होगा। कारण, जिस कार्यदायी संस्था को
आरजीजीवी (राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण) योजना में 300 आबादी से ऊपर के
मजरों के विद्युतीकरण का जिम्मा सौंपा गया है, वह अभी 1836 मजरों में से
एक भी मजरे का विद्युतीकरण नहीं कर पाई है।
ऐसे में 15 दिन बाद जब पूरा
जिला बिजली की रोशनी में सराबोर होकर प्रकाश पर्व का त्योहार मना रहा होगा,
तो उस समय अंधेरे की खीज एक बार फिर से उस छह लाख आबादी को झेलनी पड़ेगी,
जो बीते कई वर्षों से अपने गांव के विद्युतीकरण की आस लगाए बैठी है।
जिले में 300 आबादी से ऊपर के ऐसे 1836 मजरे हैं, जिनके विद्युतीकरण पर बीते सात साल से अंधेरे का ग्रहण लगा है। गांवों के विद्युतीकरण के लिए वर्ष 2005 में लागू राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के पहले फेज का काम 2005 से शुरू होकर वर्ष 2009 में खत्म हो गया था।
उस समय जिले के 796 राजस्व गांवों को विद्युतीकरण से संतृप्त किया गया था। तभी से जिले के बाकी बचे 300 आबादी से ऊपर के 1836 मजरों के लोग विद्युतीकरण की आस लगाए बैठे थे, जिसका काम आज तक जिले में पूरा नहीं हो पाया है। यही वजह है कि जिले की 1054 ग्राम पंचायतों के 1836 मजरे आज भी बिजली की रोशनी से अछूते हैं।
जिले में 300 आबादी से ऊपर के 1836 मजरों में विद्युतीकरण के काम का जिम्मा सबसे पहले हैदराबाद की फर्म आईवीआरसीएल को दिया गया था।
यह वही फर्म थी, जिसने वर्ष 2005 में जिले के 796 राजस्व गांवों को विद्युतीकरण से संतृप्त किया था। लेकिन बाद में इसका टेंडर निरस्त कर कॉरपोरेशन ने दोबारा से टेंडर कराया, जिसे समाज कल्याण ने हथिया लिया।
लेकिन टेंडर हासिल करने के छह महीने बाद तक समाज कल्याण का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति जिले में झांकने तक नहीं आया।
इससे महीनों विद्युतीकरण का काम ठप पड़ा रहा और आज स्थिति यह है कि टेंडर के एक साल बीत जाने के उपरांत विद्युतीकरण की प्रोग्रेस लगभग शून्य बनी हुई है।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के 11वें प्लान में होने वाले 1836 मजरों का विद्युतीकरण कुल 218 करोड़ रुपये की लागत से किया जाना है।
इस योजना में सभी 1836 मजरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कुल 3855 किलोमीटर एरिया में बिजली के तार खंभे खींचे जाने हैं। लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था समाज कल्याण न तो किसी गांव का विद्युतीकरण कर पाई है और न ही एक भी किलोमीटर एरिया में उसकी तरफ से खंभे गाड़कर कोई लाइन ही तैयार की गई है।
आरजीजीवी योजना में जिले के 300 आबादी से ऊपर के 1836 मजरों का विद्युतीकरण समाज कल्याण को करना है। संस्था के लोगों ने जिले में विद्युतीकरण की शुरूआत काफी देर से की है।
अभी तक उसकी तरफ से 29 मजरों में विद्युतीकरण के लिए 350 विद्युत पोल पहुंचाए जा चुके हैं। जबकि कार्यदायी संस्था के लोगों की रिपोर्ट के मुताबिक 16 मजरों में उसकी ओर से विद्युत पोल खड़े किए गए हैं। संस्था के लोगों को जल्दी से जल्दी विद्युतीकरण का काम पूरा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। -हर्ष मुंशी, मुख्य अभियंता देवीपाटन जोन
विकासखंडवार विद्युतीकरण से संतृप्त किए जाने वाले मजरे
ब्लॉक मजरे ब्लॉक मजरे
वजीरगंज 116 करनैलगंज 80
बभनजोत 125 हलधरमऊ 110
कटराबाजार 109 पंडरीकृपाल 91
तरबगंज 100 बेलसर 106
छपिया 87 इटियाथोक 116
झंझरी 122 मनकापुर 111
मुजेहना 101 नवाबगंज 100
परसपुर 135 रुपईडीह 227
नोट : जिले के 16 विकास खंडों से 300 आबादी के 1836 मजरों का चयन आरजीजीवी योजना में विद्युतीकरण के लिए किया गया है।