लेकिन वह कॉर्पोरेशन की मंशा पर खरी नहीं उतर पाई। जिसके बाद पावर कॉर्पोरेशन ने उसको दिया गया काम वापस अपने हाथ में ले लिया है। अब वैरीगेट का सारा काम पावर कॉर्पोरेशन अब खुद कराएगा। जिसके लिए जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा।
राजीवगांध विद्युतीकरण योजना के तीसरे फेज में होने वाले 100 व उससे कम आबादी के मजरों के विद्युतीकरण का ठेका अब से सवा साल पहले कार्रवाई संस्था वैरीगेट को दिया गया था। लेकिन कंपनी के लोगों ने विद्युतीकरण में इतनी ढिलाई बरती, कि मामला कॉर्पोरेशन के उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया।
जिसके बाद कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने कई बार कंपनी के लोगों के साथ मीटिंग कर विद्युतीकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। यहां तक कि कंपनी के अधिकारियों को बार-बार नोटिस जारी कर विद्युतीकरण का लक्ष्य पाने की भी हिदायत दी। लेकिन इन सबके बाद भी वैरीगेट कंपनी के लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे और विद्युतीकरण में कोई खास प्रगति नहीं हो पाई।
नतीजा गोंडा में जहां विद्युतीकरण का आंकड़ा 5607 के सापेक्ष 1500 तक नहीं पहुंचा तो वहीं बलरामपुर में कंपनी के लोग 10 फीसदी भी गांव का विद्युतीकरण कर पाने में नाकाम साबित हुए। जिसके बाद पूरे मामले को मुख्यमंत्री के ऊर्जा सलाहकार कृपाल सिंह और सीएमडी पावर कॉर्पोरेशन संजय अग्रवाल के समक्ष रखा गया।
जहां से कंपनी को एक बार फिर से नोटिस भेज कर जवाब मांगने को कहा गया। लेकिन इन सबके बाद भी जब कोई नतीजा नहीं निकला तो अंतत: पावर कॉर्पोरेशन ने कंपनी को गुडबाय कहते हुए विद्युतीकरण का सारा काम अपने हाथ में ले लिया।