गोंडा। नर्सरी कार्य से पूरे देश में धूम मचाने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब सरकारी खजाने को भरेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के एक लाख से अधिक उपभोक्ताओं से बिजली का बिल वसूलने में पावर कारपोरेशन के पसीने छूट रहे हैं, अब यह काम ग्रामीण आजीविका मिशन के समूह की महिलाओं को सौंपा है। इस पहल से एक तो समूह की महिलाओं को आमदनी होगी और रोजगार मिल सकेगा, वहीं गांव स्तर पर वह आसानी से बकाएदारों से सम्पर्क कर सकेंगी। बिजली का बिल जमा होने पर समूह को कमीशन मिलेगा। इससे समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी।
जिले के 1054 गांव पंचायतों में इस समय 2800 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इसमें 30 हजार के करीब महिलाएं जुड़ी हैं और सामूहिक गतिविधियां कर रहीं हैं। फिलहला तो सौ से अधिक समूह नर्सरी का कार्य करके आमदनी कर रही हैं। साल भर में दो से पांच लाख रुपये कमा रही हैं। इसके अलावा बकरी पालन, निमारंण कार्य के शिलापट, मास्क, सैनिटाइजर, पीपीई किट, एलईडी बल्ब, खेतों से जुड़े कार्य कर रही हैं। 500 से अधिक समूहों की ओर से कोई न कोई कार्य किया जा रहा है।
अब ग्रामीण आजीविका मिशन के समूहों को रोजगार के लिए एक नई पहल विभाग ने की है। जिसमें वह बकाया बिजली का बिल जमा कराने का कार्य करने जा रही हैं। इसमें बिल जमा होने पर समूहों को कमीशन मिलेगा और इसके लिए समूहों को अलग-अलग क्षेत्रों का कार्य तय किया जाएगा। उन्हें बकाएदारों की सूची दी जाएगी। बकाएदारों से वह संपर्क करके बिजली का बिल जमा कराने के लिए प्रेरित करने का काम करेंगी। इसके बाद जमा हुए बिलों के आधार पर उन्हें प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। समूहों की महिलाओं को बिल जमा कराने के लिए आगे आने से पावर कारपोरेशन को काफी लाभ होगा।
पावर कारपोरेशन बिजली का बिल जमा कराने के लिए हर साल प्लान लेकर आता है। बावजूद इसके करोड़ों का बिल बकाया रहता है। एक अनुमान के मुताबिक अभी छह फीसदी बिल ही ग्रामीण क्षेत्रों का जमा हो सका है। ऐसे में बिल जमा कराने का काम चुनौती भरा है। फिलहाल बड़ी संख्या में समूह की महिलाओं को इस कार्य में जुटाने से हर उपभोक्ता तक पहुंच हो सकेगी और धीरे-धीरे बिल नियमित जमा होने के शुरुआत होने की उम्मीद है। जिले में एक लाख से अधिक लोग बिल बकाया हैं।
जिला प्रबंधक ग्रामीण आजीविका मिशन नीलांबुज ने बताया कि पावर कारपोरेशन के साथ करार हुआ है, समूहों का चयन जल्द ही कर लिया जाएगा। बिल वसूली में समूह का प्रयोग कारगर सिद्ध होगा और काफी लोग बिल जमा कर सकेंगे। इससे आत्मनिर्भरता आएगी।
सीडीओ शशांक त्रिपाठी का कहना है कि गांवों में बने स्वयं सहायता समूह कई कार्य कर रहे हैं। उन्हें रोजगार देने के लिए गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है। आजीविका मिशन का पावर कारपोरेशन से अनुबंध समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक पहल है।