गोंडा। कोरोना संक्रमण के प्रकोप से पूरे जिले में दहशत का माहौल है। हर रोज सैकड़ों संक्रमितों के मिलने के साथ ही एक-दो मौत भी हो रही है। ऐसे में लोग कोरोना का लक्षण दिखते ही जांच करा लेना चाहते हैं। लेकिन जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते न ही मरीज पूरे दिन अस्पताल में भटकता रहता है, बल्कि कई अन्य दूसरे मरीजों के भी संपर्क में आकर उन्हें संक्रमित कर दे रहे हैं।
संभावित कोरोना मरीज को अन्य मरीजों के साथ ही लाइन में लगकर पर्चा कटवाना पड़ता है। जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बनी रहती है। वहीं संभावित कोरोना मरीजों को भीड़ में बुलाकर कोरोना किट बांटी जाती है। जिला अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर की कमी बताई जा रही है।
जिले में कोरोना संक्रमण की स्थित भयावह होती जा रही है। लोगों में कोरोना संक्रमण को लेकर दहशत का माहौल बना हुआ है। ऐसे में लोग कोरोना संक्रमण के लक्षण होते ही जांच कराने पहुंच जा रहे हैं।
लेकिन जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते उन्हें पूरे दिन अस्पताल में भटकना पड़ता है। उनकी वजह से अन्य मरीजों में भी कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। न कोई हेल्प डेस्क पर उन्हें सही जानकारी देता है जिसके कारण वो पूरे अस्पताल में घूमकर सबसे कोरोना जांच कहां और कैसे होगी पूछते रहते हैं।
कोरोना जांच कराने वाले मरीजों के लिए अलग से पर्चा काउंटर की व्यवस्था नहीं की गई है। संभावित कोरोना संक्रमितों को भी सामान्य मरीजों के बीच मे लाइन में लगकर पर्चा बनवाना पड़ता है। जिससे अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भी कोरोना संक्रमित होने का डर बना रहता है।
कोरोना जांच कराने आये अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि वह सुबह 10 बजे जिला अस्पताल आए हैं। उन्होंने करीब एक घंटा सामान्य मरीजों के बीच में लाइन लगाकर पर्चा कटवाया है। अब बोला गया है कि चार बजे जांच की जाएगी।
कोरोना जांच कराने आए संभावित संक्रमितों को पूरे दिन भटकने के बाद 2 बजे कोरोना जांच किट बांटी जाती है। जांच किट पाने के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ती है। गुरुवार को जिला अस्पताल में क्षेत्रीय निदान केंद्र के पास बने ट्रूनॉट जांच सेंटर के सामने सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी थी। जैसे ही स्वास्थ्य कर्मचारी ने कोरोना जांच किट बांटने के लिए नाम बुलाना शुरु किया। मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ऐसे में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
कोरोना जांच कराने आए मरीज भी अन्य मरीजों की बीच बैठकर इंतजार करते रहते हैं। उनके लिए न ही अलग से बैठने की व्यवस्था है न ही उन्हें हेल्प डेस्क पर सही जानकारी मिल पाती है। ऐसे में कोरोना संभावित मरीज भी सामान्य मरीजों के बीच घूमते व उठते बैठते हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने की संभावना है।