गोंडा। चुनाव के दौरान छोटी बातें भी बड़ा मायने रखती हैं। कई बार चुनावी नारे ही परिणाम बदल देते हैं। इसका जीता जागता प्रमाण तब सामने आया था जब 1974 के विधानसभा चुनाव में ‘जुगुर-जुगुर दिया जले, मूस लइगा बाती, श्रीराम हार जइहैं रामदेव के जाती‘ नारे से जनसंघ के विधायक और कटरा बाजार क्षेत्र के मजबूत प्रत्याशी श्रीराम सिंह साढ़े दस हजार से ज्यादा मतों से चुनाव हार गए थे।
बात साल 1974 की है, जब कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के गद्दौपुर के निवासी जनसंघ नेता श्रीराम सिंह कटरा बाजार के विधायक थे। उनके कामकाज से असंतुष्ट कुछ कार्यकर्ताओं ने जनसंघ के कद्दावर नेता अटल विहारी बाजपेई से उन्हें टिकट न देने की मांग की, लेकिन पर्यवेक्षक सुंदर सिंह भंडारी की सिफारिश पर पार्टी ने उन्हें सिंबल देकर चुनाव मैदान में उतार दिया। श्रीराम सिंह ने कार्यकर्ताओं पर तंज कसकर उन्हें चिढ़ा दिया। नाराज कार्यकर्ताओं ने सबक सिखाने के लिए 1967 में यहां विधायक रह चुके जनसंघ के ही रामदेव मिश्र को जनसंघ से अलग हुए दिग्गज नेता बलराज मधोक की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ा दिया।
जनसंघ का चुनाव निशान दीपक और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनसंघ का मशाल था। जनसंघ से भाजपा तक हिंदुत्व का नारा बुलंद करने वाले पार्टी के पुराने कार्यकर्ता 85 वर्षीय मगन सिंह वैद्य बताते हैं कि चुनाव में प्रचार के दौरान श्रीराम सिंह से असंतुष्ट कार्यकताओं ने ‘जुगुर-जुगुर दिया जले, मूस लइगा बाती, श्रीराम सिंह हार जइहैं रामदेव के जाती‘ का नारा दिया। यह नारा पूरे क्षेत्र में खूब प्रचलित हुआ, जिसका व्यापक असर हुआ और श्रीराम सिंह के विरोध में जनमत तैयार हो गया।
रामदेव को मिला 2063 वोट और जीत गए कांग्रेस के दीपनरायन
परिणाम स्वरुप साल 1969 में दस हजार मतों से जीते विधायक श्रीराम सिंह 1974 में कांग्रेस प्रत्याशी दीप नरायन पांडेय एडवोकेट से दस हजार 900 वोटों से चुनाव हार गए। हालांकि रामदेव मिश्र को मात्र 2063 वोट ही मिले थे। श्रीराम सिंह 1977, 1980 और 1985 का भी चुनाव हारते रहे। साल 1991 में राम मंदिर लहर के दौरान हिंदुत्व का उभार आया तब वह जनसंघ से बनी भाजपा के टिकट पर विधायक बन पाए। श्रीराम सिंह ने कांग्रेस के प्रत्याशी मुरलीधर मुनीम को 41470 वोटों से हराया। 1993 के विधानसभा चुनाव में श्रीराम सिंह ने दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मुन्नन खां को 29144 मतों पराजित किया। श्रीराम सिंह के निधन के बाद साल 1996 के विधानसभा चुनाव में उनके पुत्र बावन सिंह ने 12348 वोटों से जीत दर्ज की।
पहले भी बगावत कर कार्यकर्त्ता बदल देते थे तकदीर
सन 1974 में कटरा बाजार विस चुनाव में कार्यकर्त्ताओं के बगावत ने विधायक की तकदीर ही बदल दी थी। उन्हें हराने के लिए न सिर्फ पूर्व विधायक रामदेव मिश्र को चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया। इसके बाद पूरी ताकत लगाकर विधायक श्रीराम सिंह को हरा भी दिया। जनसंघ से अलग होकर चुनाव लड़ने से रामदेव मिश्र ने पूरे क्षेत्र की चुनावी फिजा ही बदल दी थी। भले ही वह संतोषजनक मत भी हासिल नहीं कर सके थे, लेकिन कार्यकर्त्ताओं की मंशा को पूरा करने में मददगार रहे।