फोटो-5 गोंडा के जिला महिला अस्पताल में पकड़ा गया फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र -संवाद
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गोंडा। जिले में फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा। साइबर कैफे के संचालक सरकार की ऑनलाइन व्यवस्था में सेंधमारी कर फर्जी प्रमाणपत्र के खेल को अंजाम देने में लगे हैं। इसके लिए तय रेट के हिसाब से पैसा लेकर खुद के स्तर से ही बेखौफ तरीके से जन्म, मृत्यु व अन्य ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। सत्यापन के बाद इन प्रमाण पत्रों की असलियत सामने आती है। इसकी शिकायत करने पर पुलिस भी चुप्पी साधे रहती है।
जिला महिला अस्पताल में बीते शुक्रवार को एक बार फिर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। दोपहर बाद एक व्यक्ति जन्म-प्रमाण पत्र में सुधार लाने के लिए अस्पताल के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय पहुंचा। इस व्यक्ति ने पटल प्रभारी को साफिया बेगम के नाम से एक जन्म प्रमाण पत्र देकर इसमें दर्ज पते में सुधार करने की बात कही। प्रमाण पत्र में महिला की जन्मतिथि एक फरवरी 1963 तथा जन्म स्थान जिला महिला अस्पताल अंकित था। प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि छह मई 2022 तथा जारी करने वाले प्राधिकारी के स्थान पर रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) महिला अस्पताल की मुहर लगी थी। जन्म प्रमाण पत्र देखते ही पटल प्रभारी को फर्जी लगा, उन्होंने प्रमाणपत्र पर अंकित नंबर को पोर्टल पर डालकर सत्यापन किया तो पता चला कि इस नंबर से कोई प्रमाण-पत्र जारी ही नहीं हुआ है। पूरे प्रकरण की जानकारी महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह को दिया गया। जिसकी शिकायत कोतवाली नगर में की गई।
पुलिस को तहरीर के बाद भी कार्रवाई नहीं
पिछले महीने 26 अप्रैल को भी महिला अस्पताल में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला सामने आया था। 1960 में जन्मे एक व्यक्ति के जन्मप्रमाण पत्र में सुधार के लिए महिला अस्पताल लाया गया था। फर्जी प्रमाण पत्र को लेकर आए व्यक्ति के खिलाफ कोतवाली नगर में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई थी। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला कई बार सामने आ चुका है। संबंधित प्रकरण को लेकर स्थानीय कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई लेकिन पुलिस की ओर से कोई खास कदम नहीं उठाए गए।
साइबर कैफे पर बन रहे फर्जी प्रमाण पत्र
जिला महिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास कॉमन सर्विस सेंटरों व लोकवाणी केंद्रों के संचालक पैसे लेकर कोई भी प्रमाण पत्र स्कैन कर जारी कर रहे हैं। जिला महिला अस्पताल के एक कर्मचारी के अनुसार जिला महिला अस्पताल ही नहीं बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास संचालित साइबर कैफे पर जन्म-मृत्यु समेत अन्य प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते हैं। इसे इतनी सफाई से स्कैन कर जारी किया जाता है कि सामान्य तौर पर इसे फर्जी बता पाना मुश्किल होता है। इस तरह की कई शिकायतें मिलने के बाद भी दोषियों की धरपकड़ को लेकर पुलिस उदासीन बनी है।