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संविदा कर्मी को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस की तलाश

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गोंडा। माझा राठ गांव के रहने वाले संविदा लाइनमैन देव नारायन यादव देवा की पुलिस हिरासत में हुई मौत की गुत्थी सुलझाने में लगी पुलिस उलझती जा रही है। तबियत बिगड़ने के बाद देवा को जिस एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया गया था उसे पुलिस अभी तक तलाश नहीं कर पाई है। एंबुलेंस चालक का बयान इस पूरे मामले की तफ्तीश में अहम भूमिका निभाएगा। थाना नवाबगंज से जिला अस्पताल पहुंचने में कैसे ढाई घंटे का समय लग गया। इसका खुलासा भी एंबुलेंस चालक के बयान से ही होगा।
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थाना नवाबगंज के जैतपुर गांव के मजरे चौहान पुरवा के रहने वाले झोलाछाप राजेश चौहान हत्याकांड में नवाबगंज पुलिस ने संविदा कर्मी देव नरायन यादव देवा को 14 सितंबर को पूछताछ के लिए थाने पर बुलाया था। पिता का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से बेटे की हिरासत में ही मौत हो गई थी। इसके बावजूद प्रभारी निरीक्षक ने उन्हें बताया कि उसका बेटा सिर्फ बेेहोश हुआ है और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। पीड़ित पिता का कहना है कि जब वह अन्य परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां उसका बेटा भर्ती नहीं मिला। करीब तीन घंटे बाद पुलिस ने उसके पुत्र का शव लाकर दिया। मृतक देवा के पिता रामबचन यादव की तहरीर पर ही थाना नवाबगंज में प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह समेत चार पुलिस कर्मियों व पुलिस टीम के अन्य सदस्यों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज है।
घटना में 15 दिनों बाद भी पुलिस देवा को किस वाहन अथवा एंबुलेंस से इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, उसकी तलाश नहीं कर सकी है। जांच में एंबुलेंस चालक का बयान अहम भूमिका निभाएगा। बता दें कि प्रभारी निरीक्षक तेज प्रताप सिंह ने देवा के पिता को बताया था कि देवा बेहोश हो गया है उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया गया है। नवाबगंज से जिला अस्पताल की दूरी 45 किलोमीटर है, यानि यह दूरी एंबुलेंस से अधिकतम एक घंटे में तय की जा सकती है। प्रभारी निरीक्षक के बताने के बाद देवा के पिता ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राधेश्याम यादव के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए थे। देवा को वहां से लेकर निकली एंबुलेंस ढाई घंटे बाद पहुंची थी। डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस कहां रही, यह चौकाने वाला है। एंबुलेंस चालक के मिलने के बाद ही पता चल सकेगा कि इतनी देर तक देवा रास्ते में कहां रहा। दूसरी तरफ देवा कांड में अभी तक आरोपी इंस्पेक्टर तेज प्रताप सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी भी नहीं हुई है।
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अस्पताल में रजिस्टर पर लिखवा दिया पिता का नाम
माझा राठ के रहने वाले देव नारायन उर्फ देवा को थाना नवाबगंज पुलिस जिला अस्पताल लेकर आई थी। आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए अब पुलिस जिला अस्पताल के रजिस्टर का हवाला देते हुए यह साबित करने की कोशिश में जुटी है कि देवा को उसके पिता रामबचन यादव ने ही इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। पुलिस के इस खेल की जानकारी देवा के परिजनों को नहीं है। पिता रामबचन यादव ने बताया कि पुलिस द्वारा पुत्र के बेहोश हो जाने की बात सुनने के बाद जिला अस्पताल पहुंच गए थे लेकिन उनके पहुंचने के डेढ़ घंटे बाद ही पुलिस एंबुलेंस से उसके बेटे को लेकर अस्पताल पहुंची। अब इस दौरान उसका पुत्र जीवित था अथवा मृत इसकी जानकारी सिर्फ एंबुलेंस में मौजूद पुलिस कर्मी अथवा एंबुलेंस चालक ही दे सकता है।
सीसीटीवी की फुटेज खंगालेगी पुलिस
जिला अस्पताल में लगे सीसीटीवी की फुुटेज पुलिस खंगालेगी। 14 सितंबर को पुलिस हिरासत में देवा की मौत के बाद उसके शव को एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। हंगामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए रख लिया गया। इसकी पूरी फुटेज जिला अस्पताल के सीसीटीवी में कैद है। इससे पहले पुलिस ने सीसीटीवी चेक करने का प्रयास किया था। प्रमुख अधीक्षक का कक्ष बंद होने के कारण फुटेज नहीं मिल सकी थी।
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अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को चेक कराया जा रहा है। जांच पूरी होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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