परसपुर के पसका सूकरखेत में सरयू नदी तट पर कलश पूजन कराते आचार्यगण। - संवाद
पसका (गोंडा)। कल्पवासियों के आगमन से सूकरखेत लघु प्रयाग का आकार लेने लगा है। पसका के पौराणिक सूकर खेत स्थित सरयू संगम के तट पर कल्पवास कर रहे साधु-संतों व श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा से पौष पूर्णिमा तक चलने वाले एक माह के कल्पवास में शामिल भक्तजन त्रिमुहानीघाट पर कुटिया बनाकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार हिरण्याक्ष नामक राक्षस सतयुग में पृथ्वी चुराकर पाताल लोक में छिप गया। तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को मुक्त कराया। इसलिए यह भूमि सूकर खेत के नाम से प्रसिद्ध हुई। सूकर खेत में ही गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास का आश्रम है। रामचरित मानस में इसका उल्लेख करते हुए गोस्वामी ने लिखा है- मैं पुनि निज गुरु सन सुनी, कथा सो सूकर खेत।
कल्पवास के लिए आए नंदबाबा का कहना है कि यहां स्नान घाट उपेक्षा का शिकार है। पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई है। रामतेज बाबा ने नदी के घाट से मिट्टी हटवाने की मांग की है। कहा कि यहां मिट्टी के हटते ही नदी के पानी का बहाव तेज होगा, जिससे घाट स्वच्छ हो जाएगा। स्नान घाट पर समुचित प्रकाश व कूड़ेदान रखने की व्यवस्था भी आवश्यक है। कचनापुर से बाबा वाल्मीकि दास व अमेठी से आए अशोक दास व अयोध्या से आए सर्वेश्वरदास ने सुझाव दिया कि घाघरा के जल में साइफन बनाकर सरयू नदी में मिलाकर त्रिमुहानी का स्वरूप दिया जाना चाहिए। बाबा रामचंद्र दास, रामदेव दास, अशोक दास, श्यामराज दास, प्रेमराम दास, मैदानीदास, दयानंद दास, रामदयाल दास, शिवकुमार दास आदि संतों ने व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन से अनुरोध किया है।
परसपुर ब्लाॅक के सहायक विकास अधिकारी पंचायत दुर्गाप्रसाद मिश्र ने बताया कि त्रिमुहानी घाट पर साफ-सफाई के लिए 34 सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। पूरे मेला परिसर को चार भागों में बांटकर सफाई का कार्य किया जा रहा है।
करनैलगंज विधायक अजय सिंह ने बताया कि पसका को राजकीय मेला घोषित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन किया है। त्रिमुहानी में साइफन के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया गया है।