स्वामी नारायण मंदिर में चल रहे भगवान घनश्याम के नौ दिवसीय छपिया महोत्सव के पांचवें दिन सात कोसी परिक्रमा निकाली गई। परिक्रमा में करीब पांच हजार हरिभक्तों का जनसैलाब उमड़ा। परिक्रमा के बाद कथा में स्वामी नित्य स्वरूपानंद ने भगवान के बाल चरित्रों की महिमा का बखान करते हुए, उनके चमत्कारों की जानकारी दी।
स्वामी नारायण मंदिर के महंत स्वामी वासुदेवानंद जी महराज ने बताया कि आज से करीब 227 वर्ष पूर्व अक्षय नवमी के दिन भगवान घनश्याम ने सात मुख वाले अश्व पर बैठकर यहां की 108 बार परिक्रमा की थी। इसके बाद से ही यहां पर सात कोसी परिक्रमा की परंपरा चली आ रही है।
इसी परंपरा के अनुसार बुधवार को अक्षय नवमी के दिन सात कोसी परिक्रमा का आयोजन किया गया। परिक्रमा से पूर्व श्रद्धालुओं ने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया और भगवान की पूजा अर्चना की। इसके बाद परिक्रमा के रथ का महंत वासुदेवानंद व हरिस्वरूपानंद जी ने विधिवत पूजन कराया।
मंदिर के स्वामी पवित्रानंद व स्वामी कृरुणानंद ने रथ पर सवार होकर सात कोसी परिक्रमा की शुरुआत कराई। मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर परिक्रमा टेरवा, नेवादा, तेनुआ सैदनपुर, सोहिला चौराहा, मसकनवा, छपिया, भिटिया बाजार, कुसुमी व अगयामाफी होते हुए भगवान की जन्मस्थली पर आकर खत्म हुई।
परिक्रमा में स्वामीनारायण के जयघोष के साथ करीब पांच हजार श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ लिया। परिक्रमा के दौरान महिलाओं के भजनों से पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद पांचवें दिन की कथा में कथा वाचक महराज नित्यस्वरूपानंद जी ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उनके चमत्कारों से हरिभक्तों को अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि भगवान घनश्याम के बालपन में जब आसुरी शक्तियों ने उन्हें मारने का प्रयास किया तो भगवान ने असुर कालीदत्त का वध कर दिया। महराज ने बालक रूप में अपने सखाओं के साथ अनेक चमत्कारी लीलाएं की। कथा पंडाल में मुख्य यजमान आशीष भाई, रमेश भाई मानसेता, सरयू भगत, अनिरुद्ध स्वामी आदि हरिभक्त मौजूद रहे।