धान खरीद के समय में सहकारिता का पीसीएफ ठनठन गोपाल है। विभाग के पास धान खरीद के लिए फूटी कौड़ी नहीं है। जबकि जिला प्रशासन व शासन ने इस विभाग के बूते बेहतर धान खरीद करने का बीड़ा उठा रखा है। यह विभाग दो नवंबर से अपने 52 धान क्रय केंद्रों पर एक साथ कैसे धान की खरीदारी कर सकेगा, इसक ो लेकर अधिकारियों के साथ किसान भी सवाल उठा रहे हैं।
जिले में इस सीजन में धान खरीद के लिए चार एजेंसियों को लगाया गया है। इसमें खाद्य रसद विभाग को चार क्रय केंद्र, यूपी स्टेट एग्रो को एक, भारतीय खाद्य निगम को एक व पीसीएफ को अकेले 52 क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं।
मार्के टिंग विभाग के सूत्रों का कहना है कि धान खरीद की तैयारी सिर्फ हवाहवाई चल रही है। जिस विभाग पर प्रशासन की ओर से अधिक भरोसा जताया गया है, उसके पास पैसा ही नहीं है। ऐसे में धान खरीद को लेकर जहां विभाग के सामने चुनौती होगी, वहीं किसानों को भारी असुविधा के दौर से गुजरना पड़ सकता है। जबकि विभाग पीसीएफ का दावा है कि अपने मुख्यालय से धान खरीद के लिए बजट की डिमांड पहले से की जा चुकी है।
इस बाबत विभाग के लोग अपनी तैयारी पूरी होने के दावे कर रहे हैं। पीसीएफ को जिले में 36 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला है। धान खरीद शुरू होने में अब जहां सिर्फ ह दिन शेष बचे हैं। इधर त्योहार को लेकर बैंकों में भी छुट्टियां भी हो जाएंगी। इसके अलावा किसान को धान के पैसे से ही रबी की फसलों की तैयारी करनी है। धान खरीद सिर पा आ जाने के बावजूद एजेंसियों की तैयारी अधूरी है। जबकि किसानों का कहना है कि धान की बिक्री हो जाने के दूसरे दिन उनके खाते में पैसा आ जाना चाहिए।