फॉर्मासिस्टों के सोमवार को किए गए दो घंटे कार्य बहिष्कार से अस्पतालों में दवा लेने आए मरीजों को खासी दिक्कतों से जूझना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की सभी 16 सीएचसी/पीएचसी से लेकर 50 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पताल तक में दवा के लिए मरीजों की लाइन सुबह आठ से 10 बजे तक लगी रही, लेकिन मरीजों को दवा 10 बजे के बाद तब मिली, जब फॉर्मासिस्टों का कार्य बहिष्कार खत्म हुआ। इस दौरान मरीजों को तपती धूप में पसीना बहाना पड़ा।
सीएमओ की कार्यशैली से नाराज फॉर्मासिस्टों ने 27 मई को एक दिवसीय धरने में दो घंटे कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी थी, जिसकी शुरूआत सोमवार को हुई।
सोमवार को आठ बजे सीएचसी-पीएचसी व जिला अस्पताल पहुंचे फॉर्मासिस्ट बजाय अपना काम करने के अस्पताल में अपनी हाजिरी लगाने के बाद बाहर निकल आए, जिन्होंने दो घंटे तक कोई काम नहीं किया।
इस दौरान जो भी मरीज दवा लेने के लिए दवा वितरण काउंटर पर पहुंचे, उन्हें लाइन में लगे खड़े रहना पड़ा। सुबह 10 बजे जब उनका कार्य बहिष्कार खत्म हुआ, तब जाकर वह अपने काम पर लौटे और दवा वितरण किया।
इस दौरान दो घंटे तक मरीजों व उनके तीमारदारों को तपती धूप में लाइन लगाए खड़े रहना पड़ा। डीपीए के सालिकराम त्रिपाठी ने बताया कि उनका कार्य बहिष्कार आंदोलन अभी चार जून तक चलेगा।
सोमवार को जो कार्य बहिष्कार आंदोलन हुआ, वह पूरी तरह से सफल रहा। आगे भी इसी तरह उनका बहिष्कार जारी रहेगा। वहीं सीएमओ की ओर से फॉर्मासिस्टों के इस कार्य बहिष्कार आंदोलन को खत्म कराने की दिशा में कोई प्रयास न किए जाने से फॉर्मासिस्टों में आक्रोश व्याप्त है।