मेडिकल कॉलेज में दवा न मिलने से निराश मरीज। - संवाद
गोंडा। मेडिकल कॉलेज में एक रुपये के परचे पर इलाज का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। यहां मरीजों को न तो दवा मिल पा रही है और न जांच की सुविधा। बुखार तक की दवा लोगों को नहीं मिल पा रही है। मरीजों को तमाम दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उठानी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 1500 से 2000 मरीज पहुंचते हैं। लौवाटेपरा के अवध कुमार मिश्र ने बताया कि भतीजे सिद्धनाथ के पैर में सूजन है। डॉक्टर ने जांच लिखी। मेडिकल कॉलेज में जांच नहीं हो पाई। तीन हजार रुपये खर्च करके बाहर जांच करानी पड़ी। दवा भी नहीं मिल पाई। माधवपुर के राय के आशाराम ने बताया कि चर्मरोग से परेशान हैं। डॉक्टर को दिखाया तो बाहर की जांच लिख दी गई। 650 रुपये खर्च करके जांच कराई है। दवा लेने आए तो बताया गया कि नहीं है। उन्होंने बताया कि जो पैसे थे जांच में खर्च हो गए। अब दूसरे दिन रुपये लेकर आएंगे तब दवा लेंगे।
झौहना चंदवतपुर घाट निवासी सीताराम ने बताया कि दांत में दर्द रहता है। डॉक्टर ने चार प्रकार की दवा लिखी है। यहां सिर्फ एक मिली है। कटरा बाजार के ननकऊ मिश्र ने बताया कि अस्पताल में कई महीने से दवाओं का संकट है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
इनसेट
जल्द दूर होगा दवाओं का संकट
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि दवाओं की किल्लत दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ दवाएं आ गई हैं। अन्य दवाएं भी जल्द ही आ जाएंगी। जिससे संकट दूर हो जाएगा।