पसका। पसका मेले में समृद्धि के साथ मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। सोमवार को भी मेले में भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ मेले का आनंद लिया और जमकर खरीदारी की।
स्थानीय स्तर पर लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र के लोगों के लिए समृद्धि का द्वार भी खोल रहा है। मेला परिसर में दुकानदारों की अच्छी बिक्री हो रही है। रविवार को भी हजारों लोग मेले में पहुंचे।
स्थानीय निवासी अंतिम सिंह और गजेंद्र सिंह ने बताया कि पौष पूर्णिमा के बाद मेला माघ अमावस्या तक चलता है। दूरदराज से लोग मेले में पहुंचते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण मौत का कुआं, झूले, सर्कस और थिएटर हैं, जिन्हें देखने के लिए खासकर बच्चों और युवाओं में उत्साह है। मेले में चाट, पकौड़े और मिठाई की दुकानों पर भी भीड़ रही। गुड़, तिल, गंजी जैसे ग्रामीण उत्पादों की भी खूब बिक्री हो रही है।
कानपुर से बक्सा और आलमारी बेचने आए सईद ने बताया कि वह हर वर्ष पसका मेले में दुकान लगाते हैं और इस बार भी अच्छी बिक्री हो रही है। बहराइच निवासी राकेश ने बताया कि वह अपने पिता के नाम से लाला हरनाम मिष्ठान भंडार चलाते हैं, जहां नाश्ता, भोजन, चाट और मिठाई की बिक्री की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मेले में तीन पीढ़ी से उनकी दुकान लग रही है। इस बार 25 दिसंबर से दुकान शुरू कर दी थी।
बरौली निवासी बेचूलाल ने बताया कि गंजी 40 रुपये किलो और 100 रुपये में तीन किलो बिक रही है। बाराबंकी निवासी मूंगफली विक्रेता रामदास ने बताया कि दो दिन में आठ से दस हजार रुपये की बिक्री हो चुकी है। तरबगंज निवासी राघवदास ने बताया कि वह हर साल शृंगार सामग्री की दुकान लगाते हैं और दो दिन में ही 15 से 20 हजार रुपये की बिक्री हो चुकी है।