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दलों को मिला झटका, जनता अपनी पंसद को जिताया

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गोंडा। राजनीतिक दलों के लिए जिला पंचायत सदस्य का पद प्रतिष्ठा से जुड़ा था। भाजपा व सपा ने करीब-करीब सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और विधानसभा चुनाव के पहले जनता का मन टटोल रहे थे। परिणाम आया तो दोनों दलों के पसीने छूट गए।
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जनता ने दलों की मनमानी और जबरन प्रत्याशी थोपने की रणनीति का करारा जवाब दिया है। दोनों दलों के वही प्रत्याशी जीत सके जिनकी जनता के बीच गहरी पैठ थी। इसके अलावा दोनों दलों के नेताओं को जनता ने कड़ा संदेश दिया है। सपा का पिछड़ा कार्ड खेलने का दांव भी उलटा हो गया और पक्ष में माहौल को भी पार्टी नहीं भुना पाई।
जिला पंचायत सदस्य से जिले के अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करना तो और बात थी लेकिन पार्टियों का असल मकसद जनता के मूड भांपने की थी। दलों के सियासी दांव पर जनता के वोट की गहरी चोट लगी है। सपा जिलाध्यक्ष आनंद स्वरूप उर्फ पप्पू यादव तो अपने गृह ब्लॉक में ही घिर गए।
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ब्लॉक की चार सीटों में एक भी पार्टी को नही दिला सके। यही नही पार्टी को जिले में भी तगड़ा झटका लगा है। इसी तरह भाजपा भी वहां एक सीट ही निकाल सकी।
यहां तक पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी की पत्नी विमला देवी भी चुनाव नहीं जीत सकीं। इसी तरह गोंडा के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैय्या को भी तगड़ा झटका लगा है, माना जा रहा है कि भाजपा की सूची में ज्यादातर प्रत्याशी उन्हीं के पसंद के थे।
मनकापुर चतुुर्थ से तो उन्होंने पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीयूष मिश्र को प्रत्याशी बनवाया था और जिता भी नही सके। चुनाव प्रचार में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक रखी थी।
मंत्री रमापति शास्त्री समेत दो विधायक भी प्रचार में जुटे थे। फिर भी यहां सपा ने जीत दर्ज करके पार्टी की मुश्किल में खड़ा कर दिया है। इसी तरह सदर विधानसभा की आठ जिला पंचायत सीटों में सपा के खाते में एक ही सीट जा सकी है। इसी तरह कमोबेश हर ब्लाक में दोनो दलों की यही स्थिति थी। जिला पंचायतों के परिणाम से दोनो दलों के लिए जनता का फैसला मुश्किल भरा है।
जिला पंचायत सदस्य के परिणाम के साथ ही अब अध्यक्ष जिला पंचायत के दावेदार पर कयासों का दौर शुरू हो गया है। पहले भाजपा के रणनीतिकार मनकापुर चतुर्थ से प्रत्याशी पीयूष मिश्र की जीत पर दावेदारी पक्की मान रहे थे। माना जा रहा था कि गोंडा सांसद इस बार अध्यक्ष के पद पर दांव चलेंगे।
लेकिन परिणाम के बाद अब भाजपा के रणनीतिकारों के कयास थम गए हैं। हर बार अध्यक्ष जिला पंचायत के चुनाव में कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह की रणनीति सफल रहती थी। इस बार उन्हें पार्टी ने तवज्जो नही दी। जिसका असर भी सामने आ चुका है। अब माना जा रहा है कि अध्यक्ष के चुनाव में कोई नया दांव देखने को मिलेगा।
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