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Gonda News: फसलों व सेहत के लिए खतरा बनी गाजर घास

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बेलसर। खेतों और खाली जमीनों पर तेजी से फैल रही गाजर घास फसलों तथा इंसानों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन गई है। एडीओ पंचायत कृषि विकास सिंह ने बताया कि यह हानिकारक खरपतवार फसलों के साथ पानी, पोषक तत्व और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करता है। इससे धान, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जियों की पैदावार में 30 से 90 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके पौधों से निकलने वाले विशेष रसायन मिट्टी की उर्वराशक्ति घटाते हैं और दूसरी फसलों का जमाव व वृद्धि रोक देते हैं।
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क्षेत्र के किसान नन्हे सिंह ने बताया कि इस घास से पूरी फसल खराब हो रही है और इसे छूने मात्र से तेज खुजली होने लगती है। इसके परागकण हवा में घुलकर एलर्जी पैदा करते हैं, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, आंखों में जलन, लगातार छींक और दमा जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। पशुओं के इसे चरने पर दूध की गुणवत्ता खराब होती है और उन्हें मुंह के छाले, त्वचा रोग व पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
बचाव व नियंत्रण के उपाय
बचाव के लिए गाजर घास को फूल आने से पहले दस्ताने व मास्क पहनकर जड़ समेत उखाड़ देना चाहिए। रास्तों और खाली स्थानों पर एक से 1.5 प्रतिशत ग्लाइफोसेट या टू-फोर-डी का छिड़काव करें। यह छिड़काव चार से छह पत्तियां होने पर ज्यादा असरदार होता है। जायगोग्राम्मा बाइकलोराटा नामक कीट भी इसे खाकर प्राकृतिक रूप से नष्ट कर देता है। जमीन खाली छोड़ने के बजाय वहां ढैंचा, सनई या नेपियर घास उगाएं और खेतों की लगातार सफाई रखें।
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