ग्राम पंचायतों का चुनाव हो गया। इसके बावजूद करीब दो हजार पंचायत सदस्यों के पद खाली रह गए। लेकिन अधिकतर ग्राम पंचायतों में चुने गए प्रधानों के करीबी चुनाव जीते हैं या फिर वे निर्विरोध घोषित हो चुके हैं। ऐसे में विकास कार्यों को लेकर बनने वाली समितियों में निर्णायक भूमिका निभाने वाले सदस्य एक बार फिर ग्राम प्रधानों के सिर्फ रबर स्टांप बन कर रह जाएंगे।
इस बार भी अधिकतर ग्राम पंचायतों के चुनाव में धन व बाहुबल हावी रहा है। ऐसे में पंचायतों में सदस्यों के बहुत कम चल पाने की उम्मीद बनी है।
ग्राम प्रधानों ने अपनी बहुमत वाली सरकार हो, इसके लिए उन्होंने अपने क्षेत्र से अधिक से अधिक या तो जिताऊ कंडीडेट का नामांकन अपने खर्चे पर करवा दिया था या फिर दबाव बना कर उन्हें निर्विरोध करवा दिया है। ऐसे में प्रधान ही सर्वेसर्वा होगा। ऐसे में सदस्य ग्राम पंचायतों में अपना रचनात्मक योगदान नहीं दे सकेंगे।
ग्राम पंचायतों में करीब 2003 सदस्यों के खाली रह गए पद प्रशासन व पंचायतों के लिए चुनौती बने हैं। खाली रह गए पदों पर या तो सदस्य मनोनीत किए जाएंगे या फिर उन पर चुनाव कराना होगा। ऐसा माना जा रहा है कि खाली रह गए पदों पर सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा।
ग्राम पंचायत सदस्यों के पंचायतों की कार्यवाही में कई तरह के अहम रोल होते हैं। ग्राम पंचायत सदस्य ग्राम पंचायत के विकास कार्यों के एजेंडा तैयार किए जाने में अपनी राय दे सकता है।
यदि कहीं विकास कार्य जन उपयोगी न हो तो वह उसका विरोध कर सकता है। बैठक में जो विकास कार्यों पर नये प्रस्ताव रख सकता है। प्रस्ताव पास होने पर एजेडे पर अपने हस्ताक्षर करेगा। वह ग्राम पंचायत के वित्तीय लेखा जोखा की जानकारी ले सकता है। साथ खातों को देख सकता है।
कुल सदस्य पद- 13023
कुल निर्विरोध हुए सदस्य- 6000
निर्वाचित सदस्य- 5020
खाली सदस्य पद- 2003