गोंडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिले की करनैलगंज नगर पालिका परिषद में करुआ गांव के विलय के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इसमें एक हजार से कम आबादी वाले ग्राम पंचायतों के विलय संबंधी सरकार के निर्णय को वैध ठहराया गया है। स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायत के गठन और उसके अस्तित्व के लिए न्यूनतम आबादी का निर्धारण वर्तमान जनसंख्या नहीं, बल्कि अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने गोंडा की करुआ ग्राम पंचायत के विलय को चुनौती देने वाली गुड़िया गोस्वामी समेत 293 याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने 19 अप्रैल 2023 की उस अधिसूचना को सही माना, जिसके तहत करुआ ग्राम पंचायत को समाप्त कर उसकी शेष आबादी और क्षेत्र को कुम्हरौरा ग्राम पंचायत में शामिल कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि करुआ गांव का कुछ हिस्सा करनैलगंज नगर पालिका परिषद में शामिल होने के बाद भी ग्राम पंचायत की वास्तविक आबादी 1719 और मतदाताओं की संख्या 1104 थी। इसलिए ग्राम पंचायत को समाप्त करने का निर्णय मनमाना और अवैध है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि ग्राम पंचायत के अस्तित्व का निर्धारण 2011 की अंतिम प्रकाशित जनगणना के आधार पर किया गया। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया।