किसानों को रास नहीं आई एमएसपी, अब तक 1652 लोगों ने बेचा
संवाद न्यूज एजेंसी गोंडा। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचना रास नहीं आ रहा है। वह आढ़तियों के हाथों अपनी उपज बेचकर नकद पैसा लेना बेहतर समझ रहे हैं। जिसके चलते खरीद लक्ष्य से कोसों दूर रह गई है। इधर, डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा का दावा है कि एमएसपी से बाजार भाव अधिक है। इसलिए किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच रहे। प्रभारी गांव में जाकर किसानों को प्रेरित करेंगे।
जिले में करीब पांच लाख किसान गेहूं की खेती करते हैं। जिसको देखते हुए एक मार्च से 116 क्रय केंद्रों के माध्यम से एमएसपी पर गेहूं की खरीद शुरू की गई है। करीब तीन माह बीतने को हैं लेकिन अभी तक मात्र 1652 किसानों ने 8570 मीट्रिक टन गेहूं ही बेचा। जबकि अन्य किसानों ने आढ़तियों के हाथों अपनी उपज बेच डाली। शासन की ओर से इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य 98,000 एमटी रखा गया था, लेकिन अभी तक मात्र 8.7 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी। जबकि गांव के किसानों का दावा है कि लगभग सभी की फसल कट चुकी है।
छह एजेंसियों को मिला जिम्मा :
इस बार छह क्रय एजेंसी को गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसमें खाद्य विभाग 20,000 मीट्रिक टन, पीसीएफ को 33,000 एमटी, पीसीयू को 42,000 एमटी, यूपीएसएस को 20,000 एमटी, भारतीय खाद्य निगम को 11,700 एमटी तथा कृषि उत्पादन मंडी समिति को 4,000 एमटी का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें सबसे अधिक भारतीय खाद्य निगम केंद्र पर सबसे अधिक 1105.05 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। पीसीएफ पर सबसे कम 924.49 एमटी खरीद हो पाई।
एमएसपी से अधिक बाजार भाव :
एमएसपी से बाजार में उपज का मूल्य अधिक और नकद मिल जा रहा है, जबकि केंद्रों पर लेटलतीफी और सरकारी तामझाम से बचना भी कारण है। इंद्रापुर के किसान चंद्रप्रकाश ने बताया कि सरकारी रेट 2275 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि खुले बाजार में गेहूं 2280 से 2320 रुपये तक बिक रहा है। अब लगभग सभी किसानों का गेहूं बिक चुका है। कुछ लोग घर में रखकर भाव चढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।