कोर्ट से सात वर्ष की सजा पा चुके व्यक्ति का पंचायत चुनाव में नामांकन वैध किए जाने के साथ ही उसे प्रधान पद पर विजयी होने का प्रमाण पत्र देने का मामला उच्च न्यायालय में पहुंच गया है। जिस पर न्यायालय ने 18 जनवरी को जिम्मेदार अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
मामला विकास खंड करनैलगंज की ग्राम पंचायत गुमदहा से जुड़ा है। यहां नव निर्वाचित ग्राम प्रधान ननकू को अपर सत्र न्यायाधीश गोंडा द्वारा 18 मई 2010 को धारा 147 व 304 के मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई गई थी।
ननकू ने पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था जो जांच में वैध पाया गया, जबकि ग्राम गुमदहा निवासी चन्द्रभान सिंह ने उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर नामांकन असंवैधानिक होने का आरोप लगाया था।
इस पर उप जिलाधिकारी वीके सिंह ने रिटर्निंग अफसर को पत्र लिखा कि उक्त सजायाफ्ता ननकू का चुनाव में बतौर प्रत्याशी भाग लिया जाना अनुचित है। मगर तब तक नामांकन वापसी व खारिज किए जाने का समय पूर्ण हो चुका था।
चुनाव में ननकू को विजय भी मिल गई। उसे प्रधान पद पर निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र भी दे दिया गया। जिसको गुमदहा निवासी अरविंद कुमार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में सचिव पंचायतीराज, जिलाधिकारी गोंडा, रिटर्निंग अफसर सहित सात लोगों को शामिल किया गया है। जिस पर न्यायालय ने प्रतिवादियों को 18 जनवरी 2016 को काउंटर एफीडेविड देने का आदेश दिया है।
उधर, एसडीएम वीके सिंह व रिटर्निंग अफसर विनय सिंह ने बताया कि शिकायत काफी देर से मिली थी, तब तक नामांकन को साक्ष्यों के आधार पर शामिल किया जा चुका था। उसके बाद चुनाव प्रक्रिया में बदलाव किया जाना संभव नहीं था।