गोंडा। जिला कारागार के बंदियों के लिए खुशखबरी है। जिला कारागार में निरुद्ध साढ़े आठ सौ बंदियों का इलाज अब आसान होगा। अभी तक बंदियों को एक्सरे कराने के लिए पुलिस अभिरक्षा में जिला अस्पताल जाना पड़ता था। मगर जेल प्रशासन ने बंदियों के लिए अब यह सुविधा कारागार में उपलब्ध कराने का खाका तैयार किया गया। जेल प्रशासन ने बंदियों की सुविधा के लिए एक्सरे मशीन का प्रस्ताव जेल मुख्यालय को भेजा था। जिसकी स्वीकृति मिल गई है। इसके लिए जेल मुख्यालय से 5.99 लाख रूपए का बजट मिला है। जिससे जल्द ही जेल में बंदियों के लिए पोर्टेबुल एक्सरे मशीन लगाई जाएगी। इससे बंदियों को अब एक्सरे के लिए जिला अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा।
जिला कारागार में साढे छह सौ बंदियों के रखने की क्षमता है। मगर यहां औसतन आठ से साढ़े आठ सौ तक बंदी निरुद्घ रहते हैं। इनमें से एक दर्जन से अधिक बंदी बीमार रहते हैं। बीमार बंदियों में बुजुर्गों की संख्या अधिक रहती है। मौजूदा समय में भी जिला कारागार के अस्पताल में 13 बंदी बीमारी की हालत में इलाज करा रहे हैँ। इसके अलावा हर तीसरे दिन 5 से 6 बंदियों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांच कराने का चिकित्सक परामर्श देते हैँ। ऐसे में एक्सरे के लिए इन बंदियों को जिला अस्पताल भेजना पड़ता था। मगर जेल प्रशासन के प्रस्ताव पर जेल मुख्यालय ने बंदियों के इलाज के लिए जिला कारागार में एक्सरे मशीन लगाने की स्वीकृति दी है। इसके लिए 5.99 लाख रूपए का बजट भी स्वीकृति कर दिया है। जिससे जल्द ही जिला कारागार में एक्सरे मशीन लगाई जाएगी। इसके बाद बंदियों को जेल में एक्सरे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
एक्सरे मशीन तो मिली पर अल्ट्रासाउंड नहीं
जिला कारागार के बंदियों के इलाज के लिए एक्सरे मशीन तो मिल गई। पर अल्ट्रासाउंड मशीन जेल प्रशासन के पास अभी भी नहीं है। यहां चिकित्सक अधिकांश बंदियों को अल्ट्रासाउंड कराने का परामर्श देते हैँ। ऐसे में कारागार के बंदियों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला अस्पताल भेजना पड़ता है। जिससे जेल प्रशासन के सामने गारद की समस्या बरकरार रहती है।
इलाज के लिए समय पर नहीं मिलते बंदी रक्षक
जिला कारागार के बीमार बंदियों के इलाज के जिला अस्पताल भेजने को पुलिस महकमे की ओर से समय पर गारद नहीं मिलती है। हालांकि जेल प्रशासन अग की किसी बंदी तबियत ज्यादा बिगड़ गई तभी गारद की मांग करता है। मगर इसके बावजूद भी गारद ने मिलने से बंदी रक्षकों को बंदियों के साथ भेजना पड़ता है। एक्सरे व अन्य जांच के लिए पुलिस गारद का मिलना तो बिल्कुल आसान नहीं है।
33 साल पुरानी एक्सरे मशीन हुई कंडम
जिला कारागार में 33 साल पहले वर्ष 1986 में बंदियों के इलाज के लिए लगाई एक्सरे मशीन वर्ष 2006 में खराब हो गई थी। पिछले 13 साल से एक्सरे मशीन खराब होने से बंदियों के इलाज में परेशानी हो रही थी। खराब पड़ी पुरानी मशीन को कंडम कर दिया गया है। पुरानी एक्सरे मशीन की अब नीलामी की जाएगी। जिससे मिलने वाली धनराशि को कारागार के कोष में जमा किया जाएगा।
जिला कारागार में साढ़े आठ सौ बंदी निरुद्घ हैं। इनमें से बीमार बंदियों का एक्सरे कराने के लिए उन्हें जिला अस्पताल भेजना पड़ता था। एक बंदी को अस्पताल भेजने में दो बंदी रक्षकों की ड्यूटी लगानी पड़ती थी। जिससे दिक्कतें आ रही थीं। जेल मुख्यालय को नई एक्सरे मशीन का प्रस्ताव भेजा गया था। जिसकी स्वीकृति मिल गई है और बजट भी स्वीकृत हो गया है। नई मशीन मिलने से अब बंदियों का जेल में ही एक्सरे कराया जाएगा। -शशिकांत सिंह, जेल अधीक्षक