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अब तंबाकू व सब्जी के किसानों को अलग से मिलेगी खाद

Sat, 19 Sep 2015 11:42 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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अब रबी, खरीफ व जायद सीजन की फसलों के हिस्से की खाद में तंबाकू व सब्जी की फसलों की सेंधमारी नहीं होगी। पहली बार तंबाकू व सब्जियों की फसलों के लिए अलग से खाद का आवंटन किया गया है। अनाज की फसलों के लिए आने वाले खाद की तंबाकू व सब्जी की खेती के लिए कालाबाजारी न होने से फसली सीजन में किसानों को खाद की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा।
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जिले में 2.25 लाख हेक्टेयर में रबी व खरीफ सीजन की फसलों की बोआई की जाती है। जबकि जनपद के तरबगंज तहसील क्षेत्र के नवाबगंज, वजीरगंज, तरबगंज व बेल्सर ब्लॉक क्षेत्र में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में तंबाकू की खेती की जाती है।

इसके अलावा जिले भर में 15 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती की जा रही है। अनाज की फसलों में कई कारणों से कम आय मिलने से अब कुछ किसानों का नगदी फसलों की ओर रुझान बढ़ा है हालांकि तंबाकू की खेती कई अरसे से किसान कर रहे हैं।
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बताया जाता है कि तंबाकू की खेती में जितनी सामान्य फसलों में फास्फेटिक खाद की खपत होती है, तंबाकू की फसल में उसका पांच गुना अधिक खाद खपती है। यही वजह थी कि चोरी छिपे रबी व खरीफ सीजन की फसलों के हिस्से की खाद की कालाबाजारी तंबाकू व सब्जी की फसलों के लिए की जाती थी।

ऐसे में हर साल खाद की किल्लत से किसानों को जूझना पड़ता था। लेकिन पहली बार सहकारिता विभाग ने इस समस्या का हल निकालते हुए तंबाकू व सब्जी की खेती के लिए फास्फेटिक के अलावा यूरिया की भी अलग से व्यवस्था की है।

अब नगदी फसलें अनाज के फसलों के हिस्से की खाद में सेंधमारी की वजह नहीं बनेंगी। बिचौलियों पर भी इस व्यवस्था से अंकुश लगेगा।

यह किसानों का दुर्भाग्य कहें या शासन की अदूरदर्शिता आज तक तंबाकू की खेती को किसी सीजन में फसलों के आच्छादन में शामिल ही नहीं किया गया था। इससे तंबाकू की खेती करने वाले किसानों को निवेश के रूप में खाद आदि की आपूर्ति नहीं हो पाती थी।

तंबाकू में मोटा मुनाफा होने से किसान कालाबाजारी में भी फास्फेटिक खाद आसानी से खरीद लेते थे। नतीजा ये होता था कि धान, गेहूं की खेती में लगे किसानों को बोआई के लिए खाद की किल्लत का सामना करना होता था। जबकि इसका फायदा खाद माफिया उठा रहे थे।

प्रगतिशील किसान शत्रोहन यादव का कहना है कि इस व्यवस्था से खाद की आंतरिक कालाबाजारी व किल्लत पर रोक लग सकेगी। इसका फायदा अब किसानों को मिलेगा।

इनसेट
चिह्नित समितियों को आवंटित की गई खाद
समिति         फास्फेटिक        यूरिया
टिकरी         30                    30
लिदेहना ग्रंट    30                    30
पहली         30                    30
काजीपुर     30                    30
कोल्हनपुर     30                    30
परसिया     30                    30
चन्दापुर     30                    30
वजीरगंज     30                    30
अचलपुर     30                    30
करदापुर     30                    30
नौबस्ता     30                    30
मझारा         30                    30
गेड़सर        30                    30
सेहरिया     30                    30
गड़ौली         30                    30
रांगी        30                    30
कुल         480                    480
नोट- सभी साधन सहकारी समितियों को आवंटित खाद की मात्रा मीट्रिक टन में है।

जिले में तमाम किसान तंबाकू व सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इससे होने वाली आय से इन किसानों की आजीविका जुड़ी है। इस तरह की खेती के लिए अलग से खाद की व्यवस्था न होने से न सिर्फ इस खेती से जुड़े किसानों को खाद की दिक्कत होती थी, बल्कि खरीफ व रबी सीजन के लिए आवंटित खाद की तंबाकू सब्जी की फसल के लिए कालाबाजारी होने की भी शिकायतें आ रही थीं। पहली बार तंबाकू व सब्जी की खेती के लिए फास्फेटिक व यूरिया की अलग से व्यवस्था कर दी गई है, ताकि हर स्तर के किसानों को लाभ मिल सके।  -राघवेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता गोंडा
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