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अब मनमानी गन्ना सट्टा नहीं बढ़वा सकेंगे गन्ना माफिया

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गोंडा। अब गन्ना माफिया मनमानी कर अपना गन्ना सट्टा नहीं बढ़वा सकेंगे। सभी गन्ना किसानों के खतौनी व गन्ना सर्वे के क्षेत्रफल का मिलान राजस्व अभिलेखों से किया जा रहा है। गन्ना किसानों को 20 सितंबर तक प्री कैलेंडर का वितरण कर दिया जाएगा। किसान प्री कैलेंडर चेक कर सट्टा, गन्ना वैरायटी, रकबा जैसी गड़बड़ी को ठीक करा लें। पेराई सत्र के दौरान किसी भी किसान के गन्ना रकबा, वैरायटी, बेसिक कोटा, गन्ना सट्टा आदि का संशोधन नहीं किया जाएगा। गन्ना रकबा, सट्टा आदि बढ़वाने को लेकर होने वाले सभी खेल रास्ते पर ब्रेक लगा दिया है। गन्ना आयुक्त ने वास्तविक गन्ना किसानों के आपत्तियों की सुनवाई कर उसके समाधान के लिए भी टाइमलाइन तय कर दिया है।
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देवीपाटन मंडल में गन्ना पेराई सत्र 2019-20 के लिए गन्ना रकबे का सर्वे हो चुका है। मंडल के कुल किसानों के पास कितना रकबा है, किस प्रजाति का गन्ना है, किसान के पास कितना गन्ना पेड़ी व पौधा है इन सबका खाका तैयार हो गया है। गन्ना किसान के बेसिक कोटा आदि को जोड़कर किसानों को पर्ची निर्गत करने का प्री-कैलेंडर भी तैयार हो चुका है।
किसानों के पास वास्तविक कितना गन्ना रकबा है, किस वैरायटी का गन्ना बोया है इसका सही सर्वे हुआ है कि नहीं, कोई प्लाट छूटा तो नहीं है इस बात से किसानों को जानकारी दिये जाने के लिए गन्ना विभाग व चीनी मिलों की ओर से संयुक्त मेला/प्रदर्शन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। किसानों के गन्ना सर्वे में कोई त्रुटियां तो नहीं हैं उसे चेक कर उसके संशोधन के लिए गन्ना विभाग की ओर से प्लान बनाया गया है। किसानों को कैलेंडर वितरण किये जाने के सात दिन तक सभी समितियों में आपत्तियां ली जाएंगी। सभी समितियों के गन्ना सुपरवाइजर व सीडीआई किसानों के आपत्तियों की जांच कर उसका गुणवत्तापरक निस्तारण कराएंगे।
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सभी किसानों को देना होगा घोषणापत्र
सभी गन्ना किसानों को खतौनी के साथ घोषणा पत्र भरकर देना होगा। गन्ना सुपरवाइजर की ओर से सभी किसानों को घोषणापत्र का वितरण किया जाएगा। घोषणापत्र में किसानों को अपने गन्ना खेत का रकबा, मोबाइल नंबर, गाटा संख्या, नाम पता का ब्यौरा देना होगा।
आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही होगा संशोधन
गन्ना किसानों के सामान्य समस्याओं का ही डीसीओ लेबल पर संशोधन संभव है अन्य संशोधन प्रदेश के गन्ना आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही लंबी प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा। किसानों के नाम, गन्ना सप्लाई करने के संसाधन, बैंक, आधार नंबर व मोबाइल नंबर आदि का संशोधन डीसीओ स्तर से किया जा सकेगा। जबकि गन्ना वैरायटी, गन्ना रकबा, पौधा-पेड़ी, नये गन्ना किसान मेंबर, वरासत वाले गन्ना मेंबर, छूटे खेत, बेसिक कोटा, गन्ना सट्टा व बांड आदि के बारे में संशोधन में लंबी प्रक्रिया चलने के बाद हो सकेगी। इसमें समितियों डीसीओ को प्रस्ताव भेजेंगी। डीसीओ प्रस्ताव को डिप्टी सीसी के पास भेजेंगे जबकि डिप्टी सीसी संशोधन प्रस्ताव गन्ना आयुक्त को भेजेंगे वहां से अनुमोदन के बाद ही संशोधन हो सकेगा।
समय से कैलेंडर की त्रुटियां ठीक करा लें किसान
अब किसी के लिए भी गन्ना सट्टा आदि में किसी भी तरह की गड़बड़ी कर पाना संभव नहीं है। किसानों को प्री-कैलेंडर 20 सितंबर तक वितरित कर दिया जाएगा। किसान अपने कैलेंडर में जो त्रुटियां हों उसे ठीक करा लें। कैलेंडर संशोधन के लिए समय निर्धारित कर दिया गया है। पेराई सत्र में सट्टा, गन्ना, वैरायटी, सर्वे में छूटे खेत को जोड़ा नहीं जा सकेगा। गड़बड़ी मिलने पर गन्ना सुपरवाइजर व सीडीआई पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त देवीपाटन मंडल।
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