गोंडा। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शासन की ओर से बड़ी योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए पीजीआई और केजीएमयू के डॉक्टरों को जिले में कोविड के इलाज में सहायता के लिए लगाया जायेगा। बताया जा रहा है कि अब जिलों के कोविड अस्पताल को अब पीजीआई और केजीएमयू से जोड़ने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए शासन की ओर से सभी जिलों के डीएम और सीएमओ को निर्देश जारी किये गये हैं। प्रत्येक जिले से ब्योरा तलब किया गया है।
बता दें कि गोंडा में इस समय कुल तीन कोविड लेवल-1 के तीन अस्पताल और लेवल-2 के दो अस्पताल संचालित हैं। प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते कुछ दिनों में प्राइवेट कोविड अस्पतालों का रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं है। बताया जा रहा है कि प्राइवेट अस्पतालों में अधिकतर भर्ती होने वाले मरीजों की मौत हुई है, दूसरे इलाज के नाम पर पैसे भी वसूले जाते हैं। इसके लिए शासन की ओर से केजीएमयू और पीजीआई में अपनाये जा रहे इलाज के तरीकों को जिलों के अस्पतालों से साझा करने के लिए प्लान बनाया गया है जिससे मरीजों की मौत की दर को कम किया जा सके। ये डॉक्टर कोविड अस्पतालों की टीम से वर्चुअली बात करेंगे और अपने इलाज के अनुभवों को साझा करेंगे। साथ ही जिले की टीमों को सुझाव भी देंगे।
जिले में नहीं है कोई कोविड लेवल-3 अस्पताल
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए केवल लेवल-2 का कोविड अस्पताल है। लेवल-3 के इलाज की सुविधा गोंडा में नहीं है। गंभीर रूप से कोरोना पॉजिटिव लोगों को इलाज के लिए लखनऊ भेजा जाता है। बता दें कि अब जिले में लेवल-2 स्तर के दो अस्पताल हैं। जिसमें जिला अस्पताल में नये बने कोविड अस्पताल में 126 बेड और एससीपीएम के निजी अस्पताल में कोविड लेवल-2 के 100 बेड हैं।
शासन की ओर से पीजीआई और केजीएमयू के डॉक्टरों के सुझाव हमारी टीमों के लिए काफी सार्थक सिद्घ होंगे। जिससे मरीजों के इलाज में सहायता भी मिलेगी और साथ ही रिकवरी भी बढ़ जायेगी। वैसे कोरोना मरीजों के इलाज की पूरी तरह से मॉनीटरिंग की जा रही है। -डॉ. मधु गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी