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अब क्लिक करते ही कंप्यूटर पर होगी केस डायरी

Sun, 09 Aug 2015 11:05 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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दीवान जी, मेरा आर्म लाइसेंस-पासपोर्ट की संस्तुति हुई की नहीं। मेरी एफआई दर्ज हुई की नहीं। इसके लिए थानों का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। अब क्लिक करते ही केस डायरी (आरोप पत्र/फाइनल रिपोर्ट), आर्म लाइसेंस, पासपोर्ट, समाधान दिवस, अपराध आकड़ा सहित पुलिस थाने से जुड़ी सभी जानकारी कंप्यूटर की स्क्रीन पर होगी।
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सभी थानों को ऑनलाइन करने के लिए डाटा फीडिंग शुरू कर दी गई है। इससे पहले सिर्फ एफआईआर को आनलाइन किया गया था। मगर नई व्यवस्था से अब लोगों को पुलिस थाने का चक्कर नहीं लगाना होगा। इसके लिए कंप्यूटर के माउस को क्लिक करते ही पूरा डाटा कंप्यूटर की स्कीन पर सामने होगा। इससे लोगों को पुलिस थानों मे दर्ज कराई गई शिकायतों समेत अन्य जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

थानों में शिकायत व एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र फाइल करने के लिए फरियादी एवं पीड़ित को साइबर ढाबे पर या अपने सिस्टम पर यूपी पुलिस की साइट खोलने के बाद जनपद के आप्शन में जाना होगा। यहां क्लिक करते ही जनपद के सभी थाने सामने होंगे।
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थाने के नाम से उसकी साइट पर शिकातय/एफआईआर का प्रार्थना पत्र मेल करेंगे। प्रार्थना पत्र मिलते ही थाना प्रभारी उसकी 24 घंटे में जांचकर फरियादी के पते/साइड पर जवाब मेल करेंगे। पीड़ित व्यक्ति की शिकायत अगर सही है तो उसकी एफआईआर दर्ज करके उसकी साइट पर एफआईआर की कॉपी थाना प्रभारी उसे भेजेंगे।

इसके अलावा एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी प्रगति की भी जानकारी मिल सकेगी। इसी साइट पर आर्म लाइसेंस, पासपोर्ट, चरित्र सत्यापन का डाटा भी देख सकेंगे। अपराधियों का भी रिकार्ड पुलिस की साइड पर होगा। इसमे अपराधियों की फोटो व थम्ब इम्प्रेशन साइड पर होगा।

अगर किसी व्यक्ति को किसी अजनबी के बारे में जानकारी की जरूरत हो और वह व्यक्ति अपराधी हो तो क्रिमिनल के आप्शन में जाकर उसकी फोटो पेस्ट करते ही उसका पूरा ब्यौरा सामने होगा।

थानों में तैनात पुलिसकर्मियों को सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम) योजना के तहत पुलिस लाइंस के सभागार में प्रशिक्षण दिया गया है। हर एक थाने के थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक, दीवान व सिपाही को तीन सिफ्ट में दस-दस दिनों तक प्रशिक्षित किया गया है।

उन्हें नेट के जरिए अपराधियों का डाटा कलेक्ट कर सिस्टम में जोडने, शिकायतों के निस्तारण, केस डायरी, पासपोर्ट, आर्म लाइसेंस, अपराध के आंकड़े व एफआईआर दर्ज करके उसे संबन्धित फरियादी/पीड़ित व्यक्ति को मेल करने के तौर-तरीके सिखाए गए हैं।  

थानों में आने वाली शिकायतों, एफआईआर, केस डायरी (आरोप पत्र/फाइनल रिपोर्ट) समेत पासपोर्ट, आर्म लाइसेंसियों का डाटा व अपराधियों के रिकॉर्ड दर्ज कराने के साथ ही अपराधों के आंकड़े व मुकदमों से संबंधित माल का ब्यौरा रखने के लिए प्रत्येक थानों को चार-चार कंप्यूटर आवंटित किए गए हैं।

पुलिस कार्यालय से इसे जोड़ने के लिए एसपी ऑफिस को आठ, अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय को तीन व सीओ कार्यालयों को तीन-तीन कंप्यूटर का आवंटन किया गया है। इसे नेट से जोड़ने के बाद पुलिसिंग ऑनलाइन होगी।

जनपद के 18 थानों में अभी तक एफआईआर ही ऑनलाइन हो रही थी। मगर अब केस डायरी (आरोप पत्र/फाइनल रिपोर्ट) समेत, अपराध का डाटा, पासपोर्ट, आर्म लाइसेंस, समाधान दिवस, अपराधियों के रिकार्ड समेत पुलिस थाने से जुड़ा सभी डाटा कंप्यूटर की स्क्रीन पर होगा। इसके लिए सभी थानों के पुलिसकर्मियों सीसीटीएनएस योजना के तहत प्रशिक्षण देकर हर एक थाने में एक-एक ऑपरेटर की तैनाती की गई है।  -रवीन्द्र सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
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