उद्योग विभाग ने औद्योगिक आस्थान के लिए आवंटित भूमि पर इकाई न लगाने वाले 48 आवंटियों को नोटिस जारी किया है। उद्यमियों की लापरवाही पर विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही उनका आवंटन रद कर उक्त प्लाट को इकाई लगाने वाले इच्छुक आवेदकों को आवंटित कर देने की चेतावनी दी है।
शासन ने योजना के तहत बेरोजगारों को स्वावलंबी बनाने व औद्योगिक विकास के लिए लोगों को उद्यम लगाने के लिए औद्योगिक आस्थान में प्लाटों का आवंटन किया था। जिले के मनकापुर, खरगूपुर व करनैलगंज में 1990 में औद्योगिक आस्थान की स्थापना की गई।
यहां पर कुल 116 प्लाटों का 64 उद्यमियों में आवंटन किया गया, लेकिन इतने लोगों में से अब तक कुल 16 इकाई लगाई गई हैं। 48 ऐसे लोग हैं, जो जमीन पर सिर्फ कागज में कब्जेदार बने हैं। कई लोगों ने तो उस जमीन पर घर बनवा लिए हैं।
बताया जाता है कि कई लोग इस उम्मीद में बैठे हैं कि यह जमीन आगे चलकर उनके नाम फ्री होल्ड होकर दर्ज हो जाएगी। इससे वह अपनी किसी भी मजबूरी के चलते उसे छोड़ भी नहीं रहे हैं कि उस प्लाट को किसी दूसरे के नाम पर आवंटित कर दिया जाए, जिससे उद्यम लगाने के वास्तविक लोगों को उसे दिया जा सके।
ऐसे में उद्योग विभाग ने इन सभी डिफाल्टर आवंटित प्लाट वालों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। विभाग ने उन्हें नोटिस देकर चेताया है कि उन्होंने अब तक इकाई क्यों नहीं लगाई। ऐसे में क्यों न उनका आवंटन रद कर दिया जाए।
वहीं, इस कार्रवाई से लापरवाह व बेजा तरीके से दखल बनाए रखने वाले लोगों में खलबली मच गई है। उधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन केकी गाइड लाइन के मुताबिक कार्रवाई हर हाल में की जाएगी।
आवंटित भूखंड पर ये लगने थे उद्योग
राइस मिल, दाल मिल, आयल मिल, फ्लोर मिल, इंटरलॉकिंग ब्रिक्स, बेकरी, साबुन बनाना, मोमबत्ती आदि ।
शासन की मंशा के अनुरूप जिस उद्देश्य से उद्यम लगाने के लिए लोगोें को औद्योगिक आस्थान पर भूखंड आवंटित किए गए, वहां ज्यादातर लोगोें ने इकाई नहीं लगाई है। कुछ लोगों ने वहां घर बना कर रहना शुरू कर दिया है। इससे न तो औद्योगिक विकास होगा और न ही उद्यमी का।
जिन लोगों ने इकाई लगाने की बजाय दूसरे उद्देश्य से भूखंड पर अतिक्रमण कर रखा है, उन्हें उसे स्वत: छोड़कर दूसरे उद्यमी को उद्योग लगाने का मौका दे देना चाहिए। फिलहाल ऐसे सभी भूमि आवंटियों को उद्यम न लगाने के कारण बताने के साथ आवंटन रद करने का नोटिया दिया गया है।