जिले में तीन वर्षों में जो शौचालय निर्माण की योजना बनी और राशि दी गई, वे आज भी अधूरे हैं। केवल डॉ. राम मनोहर लोहिया लोहिया समग्र गांवों में ही 21000 शौचालय निष्प्रयोज्य हैं। इसका कारण प्रसाधन की आधी धनराशि न मिलना और शौचालय निर्माण का अधूरा होना है। इसके लिए सीधे तौर पर अधिकारियों की लापरवाही ही उजागर हुई है। पंचायत विभाग से दी गई करीब दस करोड़ की राशि बेकार हो गई और स्वच्छ ग्रामीण भारत बनाने का सपना भी चकनाचूर हो गया है।
जिले में वर्ष 2012-13 में 31 गांव डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना के तहत चयनित हुए थे। इसमें 5821 घरों में शौचालय निर्माण का कार्य शुरू किया गया।
10 हजार रुपये की लागत से बनने वाले प्रति शौचालय में 4600 रुपये पंचायत विभाग से दिए जाने थे। 4500 रुपये मनरेगा से तथा 900 रुपये लाभार्थी द्वारा दिए जाने थे।
पंचायत विभाग की ओर से 4600 रुपये प्रति शौचालय की दर से राशि लाभार्थी के खाते में भेज दी गई, लेकिन मनरेगा से होने वाला भुगतान नहीं दिया गया।
ऐसे में वर्ष 2012-13 में केवल पंचायत विभाग की ओर से दी गई राशि से केवल शौचालय की दीवार बना कर उसमें सीट रखवा दी गई। प्रसाधनों में न तो दरवाजे लगे और न ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
इसी तरह वर्ष 2013-14 में 37 गांव समग्र ग्राम के रूप में चयनित हुए। इन 37 गांवों में 10274 घरों में शौचालयों का निर्माण होना था। लेकिन मनरेगा की राशि न मिलने से ये शौचालय भी अधूरे पड़े हैं।
वर्ष 2014-15 में भी 37 समग्र गांवों में करीब पांच हजार शौचालयों में से केवल 60 प्रसाधनों का निर्माण पूरा हो पाया। इन 60 शौचालयों के लिए मनरेगा की राशि दी गई। शेष अधूरे हैं। केवल 105 समग्र गांवों में 21095 शौचालयों में से 21035 प्रसाधन अधूरे हैं।
शौचालय में मनरेगा की राशि मजदूरी के लिए दी जाती है। नियम है कि काम करने वाले मजदूर का जाबॅकार्ड हो और मस्टर रोल जारी किया जाए।
इसके बाद मस्टर रोल पर मजदूर का अंकन हो और उस श्रमिक का खाता खुला हो। इसके बाद सूची और एफटीओ बनेगा। फिर बीडीओ के डोंगल से मनरेगा की राशि का भुगतान होगा। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और मनरेगा की राशि नहीं दी गई।
गांवों में प्रत्येक घर में शौचालय निर्माण के लिए 2020 तक का समय निर्धारित किया गया है। 2020 तक हर घर में शौचालय निर्माण कराने तथा खुले में शौच जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की योजना शासन ने तय की थी।
लेकिन इस तरह अधूरे प्रसाधनों के निर्माण से न तो शौचालय बन पाएंगे और न ही वर्ष 2020 तक स्वच्छ ग्रामीण भारत का सपना साकार हो पाएगा।
10 हजार रुपये के शौचालय में मनरेगा से मिलने वाली 45 सौ रुपये की राशि लाभार्थियों को नहीं मिली। पंचायत विभाग से राशि भेज दी गई थी। रकम पूरी न मिलने से शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
समग्र गांवों में अधूरे सभी शौचालयों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण में बहुत खामियां मिली हैं। इसके लिए सभी जिम्मेदार अधिकारियों को कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। कार्य न पूरा होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति कर दी जाएगी।