मुजेहना क्षेत्र के बनकटी सूर्यबली गांव के मजरा ललकीपुरवा की रहने वाली एक युवा बेटी ने कच्ची शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर प्रदेश स्तर पर अपने गांव का नाम रोशन किया है। बीते दो दिसंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस जागरूकता अभियान के लिए इस युवा बेटी को सम्मानित कर उसकी हौसला आफजाई की है।
शराबियों और मुफलिसी के बीच अपना बचपन गुजारने वाली यह बेटी आज नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन गई है।
मोतीगंज थाना क्षेत्र के बनकटी सूर्यबली सिंह गांव का मजरा ललकीपुरवा कच्ची शराब बनाने को लेकर कुख्यात रहा है।
इसी गांव में अर्जुन आजाद भी कच्ची शराब बनाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। अर्जुन की पांच संतानों में सबसे बड़ी बेटी मोहिनी आजाद बताती है कि रोज शाम को उसके घर के बाहर शराबियों का जमावड़ा लगता था। उनकी गलत निगाहें उसे विचलित कर देती थीं।
जब वह हाईस्कूल में थी तो एक दिन उसने अपने पिता से इस बारे में बात की और परिवार की परेशानी का वास्ता देकर शराब का धंधा बंद करने के लिए कहा।
बेटी की बात समझ मोहिनी के पिता ने कच्ची शराब बनानी बंद कर दी। इसके बाद मोहिनी ने गांव के अन्य लोगों को भी इस कारोबार को बंद करने के लिए जागरूक करना शुरू किया।
लेकिन कुछ ही दिन बाद वर्ष 2012 में पिता ने उसकी शादी कर दी। शादी के बाद वह अपनी ससुराल कानपुर पहुंची तो वहां भी उसे इसी त्रासदी से गुजरना पड़ा। उसका पति भी दिनभर शराब के नशे में ही रहता।
मोहिनी का कहना है कि उसने पति को समझाने का प्रयास किया, लेकिन इस पर उसका व्यवहार और खराब हो गया। अंत में तीन महीने ससुराल में गुजारने के बाद वह सब कुछ छोड़ अपने मायके वापस आ गई।
यहां उसने संकल्प लिया कि समाज में फैल रहे जहर के इस काले कारोबार को वह बंद कराकर ही दम लेगी। मोहिनी बताती है कि कच्ची शराब के खिलाफ अभियान की शुरूआत उसने अपने गांव से ही की और लोगों को यह कारोबार बंद करने के लिए समझाना शुरू किया।
इस काम में उसे कुछ सफलता भी मिली, लेकिन तमाम दुश्मन भी बन गए। कई लोगों ने उसे जान से मारने की धमकी दी, लेकिन परिवारीजनों ने उसका भरपूर साथ दिया।
कच्ची शराब के इस अवैध कारोबार को बंद कराने में उसने पुलिस की भी मदद ली और मोतीगंज थाने में कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई।
इस अभियान में वह आसपास के कई गांवों में अब तक तमाम शराब की भट्ठियों को नष्ट करा इस धंधे को बंद करा चुकी है।
मोहिनी ने बताया कि उसके इस अभियान की जानकारी होने पर जिले के तत्कालीन एसपी राजेश कुमार पांडेय ने उसकी तारीफ की। एसपी की हौसला आफजाई से उसे अपने अभियान को जारी रखने की प्रेरणा मिली।
मोहिनी के इस अभियान को लेकर मुख्यमंत्री से सम्मान निलने के बाद गांव में भी जागरूकता आने लगी है। उसके अभियान से प्रेरित होकर गांव के रामफेर ने कच्ची शराब का कारोबार बंद कर मजदूरी करनी शुरू कर दी है।
रामफेर का कहना है कि गांव की बेटी ने हमें सही राह दिखाई और सूबे के मुख्यमंत्री से सम्मान पाकर उसने गांव का नाम रोशन किया है। गांव की कई महिलाएं भी अब उसके साथ कच्ची शराब के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।
कच्ची शराब के खिलाफ अपने इस अभियान में मोहिनी को काफी कुछ खोना पड़ा है। शराब पीने से मना करने पर ही उसके पति से अनबन हो गई और शादी के महज तीन महीने बाद ही उसे ससुराल छोड़ देनी पड़ी।
पति और ससुराल छूट जाने का गम उसके चेहरे पर साफ झलकता है, लेकिन मोहिनी का कहना है कि अब वह अपना पूरा जीवन समाज के गरीब और शोषित लोगों की सेवा में लगाना चाहती है। उसका कहना है कि पूरे प्रदेश में कच्ची शराब का काला कारोबार बंद होना चाहिए।