गोंडा। एक तरफ प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने का दावा कर रही है, वहीं जिले के माध्यमिक विद्यालयों में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जिले के कई विद्यालयों में वर्षों से खेल शिक्षक की तैनाती तक नहीं हुई है। कई स्कूलों के मैदान इतने छोटे हैं कि क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसे बड़े खेलों का अभ्यास तक संभव नहीं है। पर्याप्त सुविधाएं व प्रशिक्षण न मिल पाने से खेल प्रतिभाएं विद्यालय स्तर पर ही दम तोड़ने को विवश नजर आ रही हैं। जिले में करीब 76 राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से लगभग 40 विद्यालय ऐसे हैं, जहां खेल शिक्षक का पद खाली है।
खेल शिक्षक नहीं, खुद ही अभ्यास कर रहे छात्र
शहर के पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज में वर्षों से खेल शिक्षक का पद रिक्त है। छात्र भोजन अवकाश के समय अपने स्तर पर अभ्यास करते हैं। कभी-कभी अन्य शिक्षक बच्चों का मार्गदर्शन कर देते हैं, लेकिन नियमित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। यही स्थिति राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सरयू प्रसाद कन्या पाठशाला सहित कई विद्यालयों की है, जहां पीटी की कक्षाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं।
छोटे मैदानों ने छीने बड़े खेलों के अवसर
मारवाड़ इंटर कॉलेज सहित शहर के कई विद्यालयों में खेल मैदान तो हैं, लेकिन उनका आकार इतना छोटा है कि वहां केवल खो-खो व कबड्डी जैसे खेल ही हो पाते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स जैसी प्रतियोगिताओं के लिए मैदान उपलब्ध नहीं होने से न तो कोई भी बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित हो पाती हैं, न ही विद्यार्थियों को अभ्यास का अवसर मिल पाता है।
राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की जुबानी
राष्ट्रीय स्तर के खो-खो खिलाड़ी सलोनी ने बताया कि यदि विद्यालयों में बेहतर संसाधन और प्रशिक्षित खेल शिक्षक मिलें तो जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं। राष्ट्रीय खिलाड़ी नुजहत फातिमा ने कहा कि प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं का अभाव खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखरने नहीं देता है। नायला बानो और आदर्श प्रजापति का कहना है कि नियमित अभ्यास के लिए बेहतर मैदान और खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो जिले से कई खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं।
विशेषज्ञ बोले, मैदान और प्रशिक्षक दोनों जरूरी
खेल शिक्षक शत्रोहन शुक्ला ने बताया कि अधिकांश विद्यालयों में बड़े मैदान नहीं हैं, जिससे क्रिकेट, फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसे खेलों का अभ्यास व आयोजन नहीं हो पाता है। खेल शिक्षक राहुल यादव बताते हैं कि जिले के खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। वर्ष 2024 में देवीपाटन मंडल की बालिका टीम ने राज्य स्तर पर पहला और बालक टीम ने चौथा स्थान हासिल किया था।