कोई सफलता अंतिम नहीं होती है...। अगर आपको हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में आशातीत अंक हासिल नहीं हुए हैं या आप परीक्षा में असफल हो गए हैं तो परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। शिक्षक, चिकित्सक, अधिकारियों का कहना है कि असफलता के बाद सिर्फ कमियों को पहचान कर बेहतर प्रयास करने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या कहते हैं बुद्धिजीवी।
हार से होती है सीखने की जरूरत
मनोचिकित्सक डॉ. अशोक सिंह का कहना है कि हम न शत-प्रतिशत पढ़ सकते हैं और न ही याद कर सकते हैं। कोई भी परिणाम अंतिम नहीं है। हमेशा हार से सीखने की जरूरत होती है। मेहनत व ईमानदारी से काम करना चाहिए। प्रयास सफलता की जननी है। अगर कम अंक आए या किसी कारणवश परीक्षा में सफल नहीं हो पाए तो कमियों को पहचानें और सफल होने तक हर संभव प्रयास करें।
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बेहतर परिणाम के लिए बनाएं योजना
डीआईओएस डॉ. रामचंद्र का कहना है कि जो बच्चे हाईस्कूल में अच्छे अंक पाने से चूक गए हैं, उनके लिए इंटरमीडिएट की परीक्षा में बेहतर करने का मौका है। यही अंतिम परिणाम नहीं है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में अधिक अंक अर्जित करना ही सफलता का मानक नहीं है। प्रतियोगी परीक्षा में सफल होना असली मानक है। ऐसे में बच्चे भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार करें, ताकि बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
हर सफलता के लिए जरूरी है प्रतियोगी परीक्षा
एएसपी (पश्चिमी) राधेश्याम राय का कहना है कि हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणाम में अधिक या कम अंक मिलने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। हर सफलता के लिए प्रतियोगी परीक्षा देनी होती है। जो भी परिणाम आया उसे भूलकर आगे की तैयारी करनी चाहिए। अगर काम को पूरे मन से किया जाए तो सफलता कदम चूमती है।
परेशान होने की जरूरत नहीं है
देवीपाटन मंडल के एडी बेसिक राम सागरपति त्रिपाठी का कहना है कि अगर परिणाम आपके हिसाब से नहीं आए है तो चूक कहां हुई, इसकी पहचान कर लक्ष्य के लिए आगे बढ़ें। सभी सेवाएं प्रतियोगी परीक्षा बेस हो गई हैं। ऐसे में गलती दोहराने के बजाय सजग होकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। इससे आपको नई दिशा कभी भी मिल सकती है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है।