शहर से 500 मीटर दूरी पर बनने वाले दो बिजलीघरों के लिए जमीन खोजने की समयसीमा 31 जुलाई को खत्म होने जा रही है। इस समयावधि में अगर दोनों बिजलीघरों के लिए जमीन की उपलब्धता नहीं होती है तो यह दोनों जिले के हाथ से निकल सकते हैं। जिसकी संभावना समय के साथ बढने लगी है।
जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे बिजली उपभोक्ताओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है। आज से साल भर पहले जहां शहर में बिजली उपभोक्ताओं की कुल संख्या 27 हजार थी, तो वहीं मौजूदा वक्त इसका आंकड़ा 50 हजार पहुंच चुका है। जबकि इसके सापेक्ष शहर में बिजलीघरों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले अभी भी चार ही है।
वहीं करीब पांच हजार बिजली उपभोक्ताओं को बिना किसी 33/11केवी बिजलीघर के सीधे जेल रोड स्थित 220 केवी बिजलीघर से बिजली दी जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं की इसी बढ़ती संख्या के मद्देनजर पावर काॅरपोरेशन ने आईपीडीएस (इंटीग्रेटेड पावर डेवलॅपमेंट स्कीम) के तहत गोंडा शहर में दो बिजलीघर बनाए जाने की स्वीकृति अब से 6 महीने पहले दी थी।
लेकिन इसके लिए लखनऊ व फैजाबाद रोड पर शहर से 500 मीटर दूर जमीन की तलाश ही पावर काॅरपोरेशन के लोग अबतक नहीं कर पाए हैं। जिससे गौराचौकी की ही तरह कहीं यह दोनों बिजलीघर भी शहरियों के हाथ से न निकल जाएं, इसकी संभावना समय के साथ बढ़ती जा रही है।
लखनऊ रोड पर अभी कुछ दिनों पहले पावर कारपोरेशन ने एक जमीन बालपुर रोड पर बालपुर से कुछ पहले देखी। लेकिन इसकी दूरी शहर से ज्यादा होने के कारण इसे मंजूूर नहीं किया गया। क्योंकि शहर से अधिकतम 500 मीटर दूर इन बिजलीघरों का निर्माण लखनऊ रोड पर आईटीसी चौपाल के अलग-बगल मेन रोड तो फैजाबाद रोड पर मनकापुर बस अड्डा या फिर मुन्नन खां चौराहे के पास सडक़ किनारे किया जाना प्रस्तावित किया गया है।
लेकिन जब तक इन जगहों पर पावर कारपोरेशन को जमीन नहीं मिल जाती। तबतक इसका निर्माण होगा या नहीं, इसपर संशय बना है। क्योंकि आईपीडीएस योजना में दोनों बिजलीघरों के लिए जमीन की तलाश 31 जुलाई तक करने के निर्देश है।
देवीपाटन मंडल के आयुक्त का पदभार संभालते ही मंडलायुक्त डा.एसबीएस रंगाराव ने पहली बैठक में ही इसके लिए पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के लिए निर्देशित किया था। बावजूद इसके काफी समय बीतने के बाद भी पावर कारपोरेशन और जिला प्रशासन के अधिकारी जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करवा पाए हैं।
एक्सईएन अशोक यादव ने बताया कोशिश है कि 31 जुलाई से पहले-पहले शहर से 500 मीटर दूर बनने वाले दोनों बिजलीघरों के लिए जमीन की तलाश पूरी हो जाए। इसके लिए जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी से जमीन दिलवाने की भी मांग पत्र भेजकर की गई है। प्रशासन के सहयोग से जल्द ही जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाएगी। रही बात बिजलीघर हाथ से न निकलने की तो उनका पूरा प्रयास होगा कि जो बिजली घर प्रस्तावित हैं, वह जरूर बने।