इटियाथोक क्षेत्र के बहलोलपुर गांव निवासी एक प्रसूता की शनिवार रात मुख्यालय से लखनऊ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। बताया जाता है कि महिला के परिवारीजन उसे लेकर सिसई बहलोलपुर स्थित एएनएम सेंटर गए थे। यहां एएनएम ने काफी देर तक प्रसव के लिए महिला को रोके रखा और बाद में मुख्यालय के लिए रेफर कर दिया। वहां महिला अस्पताल से प्रसूता को लखनऊ के लिए रेफर किया गया।
लखनऊ ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवारीजनों की ओर से मामले को लेकर क्षेत्रीय विधायक से की गई शिकायत पर प्रभारी सीएमओ डॉ .गयासुल हसन ने प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, एएनएम शिवपता सिंह ने खुद को बेकसूर बताया है।
सिसई बहलोलपुर गांव में स्वास्थ्य विभाग का एएनएम सेंटर संचालित है, जहां महिलाओं की डिलीवरी के लिए सारी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। बहलोलपुर गांव निवासी छठराम ने बताया कि वह शनिवार को अपनी 35 वर्षीया पत्नी सीता की डिलीवरी के लिए उसे लेकर एएनएम सेंटर गया था।
जहां उसकी पत्नी को एएनएम ने काफी देर तक रोके रखा और जब वह आईं तो उन्होंने उसे देखते ही मुख्यालय के लिए रेफर कर दिया। मुख्यालय पहुंचने पर वहां के डॉक्टरों ने देर रात उसकी पत्नी को लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ ले जाते समय रास्ते में बाराबंकी पहुंचते ही उसकी मौत हो गई।
पीड़ित परिवारीजनों का आरोप है कि अगर एएनएम ने प्रसूता को समय रहते देख लिया होता तो उसकी हालत ज्यादा न बिगड़ती और जान बच जाती। ग्राम प्रधान बंशीधर दुबे ने बताया कि सेंटर पर तैनात एएनएम शिवपता ने काफी देर तक प्रसूता का उपचार नहीं किया और जब वह आईं तो उसे उन्होंने मुख्यालय के लिए रेफर कर दिया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
बताया जाता है कि मामले की शिकायत क्षेत्रीय विधायक नंदिता शुक्ला से करने के बाद उन्होंने प्रकरण की जानकारी सीएमओ को देते हुए इसकी जांच कराने को कहा। प्रभारी सीएमओ डॉ. गयासुल हसन ने बताया कि महिला की मौत की जांच के आदेश दे दिए हैं।
उधर, सिसई बहलोलपुर में तैनात एएनएम शिवपता का कहना है कि उनकी ओर से प्रसूता के इलाज में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई। महिला हार्ट की मरीज थी। जैसे ही उसका उपचार शुरू किया गया, उसकी सांसें जोर-जोर से चलने लगीं। इस पर उसे उन्होंने मुख्यालय के लिए रेफर कर दिया।