नूरामल मंदिर के समीप मां की प्रतिमाएं ले जाते श्रद्धालु। - संवाद
गोंडा। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। शारदीय नवरात्र इस बार 10 दिन का होगा। नौ दिन तक देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। दशमी को दशहरा के दिन व्रत अनुष्ठान पूरा होगा। पहले दिन मां के दिव्य रूप शैलपुत्री की पूजा होगी। नवरात्र के लिए बाजार में दुकानें सज गई हैं।
नवरात्र में मां को नारियल, चुनरी अर्पित की जाएगी। घरों में कलश पूजन होगा तथा नौ दिन तक मां की अखंड ज्योति जलाकर अवगुणों को त्यागने का संकल्प होगा। नौ दिनों में मां के नौ रूपों की आराधना फलदायी होती है। पूजा-अर्चना के लिए विभिन्न स्थानों पर देवी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है। खैरा भवानी मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए तैयारी पूरी की जा चुकी है। स्टेशन रोड स्थित मां काली भवानी मंदिर में साफ-सफाई करा दी गई है। मंदिर के बाहर नारियल, चुनरी, फूल-माला सहित अन्य सामानों की दुकानें सज गई हैं। खैरा भवानी मंदिर के महंत रवि ने बताया कि नवरात्र में पूजन-अर्चन के लिए तैयारी पूरी की जा चुकी है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। बेलसर ब्लॉक के उमरीबेगमगंज से दो किलोमीटर की दूरी पर उत्तरी भवानी (मां वाराही देवी) का भव्य मंदिर है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने जब पृथ्वी को बचाने के लिए वाराह अवतार लिया था तो उनके सहयोग के लिए मां ने वाराही देवी का अवतार लेकर उनका सहयोग किया था। इस मंदिर में वैसे तो पूरे वर्ष आराधना होती है, लेकिन नवरात्र में यहां पूजन का विशेष महत्व है।
गाजे-बाजे के साथ ले जा रहे मां की प्रतिमाएं
शारदीय नवरात्र में जिले के 2,098 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए रविवार से ही श्रद्धालु मां की प्रतिमाएं ले जाने लगे हैं। शहर के नूरामल मंदिर के समीप गाजे-बाजे के साथ पहुंचे तमाम श्रद्धालु वाहनों से मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा ले जाते दिखाई दिए। भदैंया गांव निवासी राजेश ने बताया कि उनके गांव में पहले दिन ही मां की प्रतिमा स्थापित करके पूजा-अर्चना शुरू कर दी जाती है।
सूर्योदय से आठ बजे तक करें कलश स्थापना
पं. रामसुरेश मिश्र ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर सुबह आठ बजे तक है। इसके बाद 11:47 बजे से 12:10 बजे तक के बीच भी श्रद्धालु कलश की स्थापना कर सकते हैं। इस बार पूरे नौ दिन तक देवी मां का पूजन होगा। दशमी के दिन माता की विदाई की जाएगी।