500 व 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद बैंकों में मची अफरातफरी रविवार को भी जारी रही। तीसरे दिन भी अधिकांश एटीएम ठप रहे। ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में नोट नहीं बदले जाने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बैंककर्मियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए बैंकिंग सुविधा में सुधार की मांग शासन-प्रशासन से की है।
भारत सरकार ने विगत आठ नवंबर की मध्यरात्रि से 1000 व 500 के नोटों को बंद करने का निर्णय लिया था। जनता को 30 दिसंबर तक बड़े नोट बदलने का समय दिया गया है। दिनचर्या के खर्चों की पूर्ति के लिए बैंक से चार हजार रुपये तक बदलने व एटीएम से दो हजार रुपये निकालने की व्यवस्था की गई है।
नोट बदलने के लिए बैंकों में भारी भीड़ जुट रही है। भारत सरकार के तमाम दावों के बावजूद नोट बदलने में लोगों को काफी असुविधा झेलनी पड़ रही है। बैंकों में नोट नहीं होने का बहाना बनाकर ग्राहकों को लौटाया जा रहा है। ये व्यवस्था लागू होने के तीसरे दिन भी तमाम बैंकों के एटीएम पूरी तरह ठप रहे। अधिवक्ता देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सर्व यूपी ग्रामीण बैंक श्रीदत्तगंज में नोट नहीं बदले जा रहे हैं।
प्रबंधक नोट नहीं होने की बात कहकर लोगों को लौटा रहे हैं। गौरा चौराहा स्थित सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में भी नोट बदलने अथवा धन निकासी न होने से खाताधारकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गैसड़ी बाजार निवासी संतोष, अशोक, हरीराम, अकबर आदि ने बताया कि इलाहाबाद बैंक गैसड़ी में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। बैंक के अंदर व बाहर दलालों की भरमार है। नोट बदलने के लिए दलाल खाताधारकों से अवैध वसूली कर रहे हैं।
विरोध करने पर खाताधारकों के साथ अभद्रता की जाती है। नगर के पंजाब नेशनल बैंक, एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक सहित अधिकांश बैंकों के एटीएम रविवार को भी ठप रहे। लोगों को पैसा निकालने के लिए लाइनों में लगने के बावजूद निराशा झेलनी पड़ी। नगरवासी विजय, घनश्याम, सूरज, अकरम, शिवलाल आदि ने बैंकिंग सुविधाओं में सुधार की मांग प्रधानमंत्री से की है।