उफ ये ठंड...गोंडा में घना कोहरा और भीषण ठंड से जन जीवन व्याकुल है।
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गोंडा। सर्द हवा के साथ ही गलन भरी ठंड से पूरा जिला कांपता रहा। घर से बाहर या आग का साथ छोड़ते ही पूरा शरीर बर्फ की तरह ठंडा हो जा रहा है। मगर बृहस्पतिवार को कड़ाके की ठंड के बाद भी स्कूलों को बंद नहीं किया जिससे दो लाख से अधिक बच्चों को सिहरते हुए स्कूल जाना पड़ा। हालांकि कड़ाके की ठंड को देखते हुए देर शाम प्रशासन ने नर्सरी से कक्षा आठ तक के स्कूल शुक्रवार व शनिवार को बंद करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा हाल तब है जब पांच सालों में पहली बार 26 दिसंबर को ठंड के तेवर इतने तीखे थे। गांवों में अलाव की व्यवस्था भी नहीं की गई। गुरुवार को तापमान न्यूनतम 4 और अधिकतम 16 डिग्री सेल्सियस रहा। ऐसा ही तापमान शुक्रवार को भी रहेगा और शनिवार को तो सबसे अधिक ठंड रहेगी। मौसम विभाग के संकेतों को मानें तो शनिवार को जिले में तापमान सबसे कम न्यूनतम 3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 15 से 16 के बीच रहेगा।
गुरुवार की ठंड की स्थिति किसी से छुपी नहीं है, हालत यह रही की सुबह से ही ठंड का कहर जारी रहा और रात जारी रहा। सुबह चार बजे तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रहा लेकिन 10 बजे तक भी ठंड के तेवर तीखे रहे। दोपहर में 12 बजे तक 10 डिग्री सेल्सियस से तापमान आगे बढ़ा और शाम तक 16 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंच सका। इसके बाद फिर तापमान में गिरावट शुरू हुई। इस तरह पूरे दिन लोगों के हांड ठंड से कांपते रहे, कपड़ों का भी असर नहीं दिख रहा था, गर्म कपड़े पहने लोग भी कांपते नजर आए। इसके अलावा सूर्य के तो दर्शन ही नहीं हो पाए, हालत यह रही कि पूरे दिन सड़कों पर भी कोहरे का कहर जारी रहा।
ऐसे ठंड के मौसम को सभी ने महसूस किया और बच्चों व बुजुर्गों की जान पर आफत भी रही। एक लाख से अधिक बच्चों ने स्कूल खुलने के बाद भी स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इसके अलावा जो गए भी वह जिम्मेदारों को कोसते नजर आए। वहीं शहर के प्रधान डाकघर चौराहे पर ही अलावा जलते नहीं मिला। जबकि दावा पूरे जिले में 300 से अधिक स्थानों पर अलावा जलाने का है। अभी तक प्रशासन की ओर से एक भी गरीब को कंबल तक नहीं दिया गया। पहली बार शायद प्रशासन की ऐसी बेरुखी ठंड में देखने को मिल रही है।
ठंड की तरह प्रशासन की अनदेखी भी बढ़ा रहा कहर
ठंड का कहर तो मौसम के हिसाब से है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और सर्द हवाओं से ठंड बढ़ता जा रहा है। सोमवार तक ठंड बेहिसाब होने का अनुमान मौसम विभाग लगा चुका है और जानकारी भी दे चुका है। इसके बाद भी प्रशासन की अनदेखी लोगों को हैरत में डाल रही है। बृहस्पतिवार को सरकारी स्कूलों को खोले रखने के साथ ही पर्याप्त स्थानों पर अलाव भी नहीं जलाए गए। अभी तक गरीबों को कंबल भी नही दिए गए हैं। ऐसे में प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठ रहा है।
ठंड को देखते हुुए अलाव जलवाए जाने की कार्रवाई हो रही है। सात रैन बसेरों में व्यवस्था की गई है और सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अभी स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से कंबल वितरित कराया जा रहा है। -आरआर प्रजापति, एडीएम