गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। इसके चलते ही अब मारपीट में घायल लोगों का मेडिकोलीगल इमरजेंसी में नहीं होगा। इसके लिए अलग से सेल तैयार कर डॉक्टरों की रोस्टरवार ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इमरजेंसी में सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज ही होगा। अब अलग सेल में मेडिकोलीगल की व्यवस्था शुरू हो गई है।
जिलेभर में होने वाली मारपीट की घटनाओं के बाद घायल का चिकित्सीय परीक्षण करने के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। प्रतिदिन 20 से 25 घायलों का इमरजेंसी में मेडिकोलीगल किया जाता है। मेडिकोलीगल बनाने में डॉक्टर को करीब 15 मिनट समय खर्च करना पड़ता है। इस दौरान अन्य गंभीर मरीजों का उपचार बाधित होने से उन्हें काफी परेशानी उठाना पड़ती थी। मरीजों को इस परेशानी से छुटकारा दिलवाने के लिए मेडिकोलीगल से जुड़े मामलों को देखने के लिए अलग सेल गठित किया गया है। यहां रोस्टरवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इमरजेंसी में सिर्फ गंभीर मरीज ही देखे जाएंगे।
अस्पताल में दवा वितरण काउंटर सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक खुला रहता है। इस दौरान ओपीडी में इलाज कराने आए व भर्ती मरीजों को दवा वितरित की जाती है। दो बजे के बाद मरीजों को दवाएं नहीं मिलतीं। सिर्फ इमरजेंसी में उपचार व जरूरी इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन अब भर्ती मरीजों को अस्पताल परिसर में ही 24 घंटे जीवनरक्षक दवाएं मुहैया कराई जा सकेंगी। इसके लिए दवा काउंटर पर आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में फार्मासिस्टों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी का कहना है कि मेडिकोलीगल सेल इमरजेंसी से अलग होने पर मरीजों को राहत मिलेगी। चिकित्सीय परीक्षण के बाद पेपर वर्क करने में समय लगता है। जिससे मरीजों का उपचार प्रभावित होता था। अब मेडिकोलीगल कराने आए मरीज व अन्य गंभीर मरीजों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा।