गोंडा। जिला अस्पताल में भले ही हर साल लाखों की दवाएं व इंजेक्शन खरीदे जा रहे हों, लेकिन कमीशन के चक्कर में डॉक्टर भर्ती मरीजों को बाहर से मंहगी दवाएं व इंजेक्शन खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। अस्पताल में निशुल्क इलाज की इच्छा लेकर आया मरीज व तीमारदार ठगा महसूस कर रहा है।
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती पुत्तन ने बताया कि फेफड़े में समस्या की वजह से सोमवार शाम को भर्ती किया गया है। भर्ती करते समय अस्पताल की ओर से एक इंजेक्शन लगाया गया है, बाकी दवाएं व इंजेक्शन बाहर से खरीदने के लिए पर्ची थमा दी गई। कल शाम से 835 रुपये की दवाएं व इंजेक्शन खरीदना पड़ा है। मरीज ने बताया कि वह आर्थिक रुप से कमजोर है मंहगी दवाएं खरीदने में मुश्किल हो रही है।
मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन राजेश ने बताया कि यहां बस नाम मात्र की दवाएं अस्पताल से मिल पा रही हैं बाकी दवाओं को बाहर से खरीदना पड़ता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों की खुले आम जेब कट रही है।
दूर-दराज से मरीज अस्पताल आकर अपने इलाज निशुल्क इलाज की इच्छा लिए भर्ती होते हैं। उन्हें निजी अस्पतालों की तरह बाहर की महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती है तो वह खुद को ठगा महसूस करते हैं। अस्पताल में आधे से ज्यादा चिकित्सक समय से ओपीडी में आते ही नहीं है।
जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल में इलाज की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यहां पर फ्री डायलिसिस, डिजिटल एक्स-रे, मॉडर्न पौथोलॉजी, सीटी स्कैन आदि की सुविधा है। जिले भर से मरीज सस्ता व मुफ्त इलाज का सपना लेकर जिला अस्पताल आते हैं।
जिला अस्पताल में हर रोज करीब एक हजार लोग निशुल्क दवा लेने की उम्मीद से आते हैं। लेकिन ओपीडी में डॉक्टर जो दवाएं लिखते हैं उसमेें से अधिकांश दवाएं जिला अस्पताल के दवा वितरण काउंटर पर नहीं दी जाती हैं।
मजबूरी में मरीजों को बाहर से कमीशन वाली मंहगी दवाएं खरीदनी पड़ती है। जिससे यहां मुफ्त इलाज का दावा सपना ही साबित हो रहा है। मरीज एक रुपये का पर्चा कटवाकर जब चिकित्सक के पास इलाज कराने जाता है तो उसे सादे कागज पर बाहर की महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं।
जिसे खरीदने में मरीज का दिवाला निकल जाता है। सामान्य उल्टी-दस्त आदि के मामले में भी छह-सात सौ की दवा बाहर से लिखी जाती है। इसके अलावा जिन मरीजों का ऑपरेशन होता है उन्हें भी करीब तीन से चार हजार रुपये की दवा बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।