गोंडा। होली त्योहार चार दिनों बाद ही है। त्योहार पर एक ओर रंग बरसते, वहीं लोग एक दूसरे के गले लगकर पुराने शिकवे दूर करते हैं। घरों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजार में भी रौनक है। रंग, पिचकारी, मिठाई और खोवा की सुबह से शाम तक खरीदारी हो रही है। 17 मार्च को होलिका दहन से त्योहार की शुरुआत होगी। बच्चों और युवाओं में खासा जोश है। इस बार विधानसभा चुनाव का परिणाम आ चुका है, इससे होली में सियासी रंग भी छूटेंगे।
होली त्योहार को अब चार दिन शेष रह गए हैं। शहर से लेकर गांव तक होलिका पहले ही स्थापित की जा चुकी है। होली का खुमार लोगों पर चढ़ना शुरू हो गया है। दुकानों पर सजी बड़ी-बड़ी पिचकारी वाली बंदूकें, डोरेमोन, स्पाइडरमैन व मगरगच्छ पिचकारियां बच्चों को लुभा रही हैं। राक्षसों के डरावने मुखौटे को भी खूब खरीदे जा रहे है जिसे होली खेलने वाले अपने मुंह पर चढ़ाएंगे। बाजार में आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के छूट और उपहार योजनाएं भी दुकानों पर लागू की गई है। इससे भी लोगों का उत्साह बढ़ा है। पहले होली पर सिलवाए गए कपड़ों की अधिक पूछ होती थी, मगर अब रेडिमेड कपड़ों की ओर युवाओं का रुझान बढ़ा है। पैंट, शर्ट और टी-शर्ट के साथ जूता के अलग-अलग कलेक्शन की खरीदारी में युवा वर्ग मशगूल है।
उधर, महिलाएं सौंदर्य प्रसाधन के सामानों की खरीददारी में तल्लीन हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए घर पर गुझिया, मिठाई बनाने के लिए मेवा, मावा आदि की भी खरीद हो रही है। बच्चों का उत्साह रंग, अबीर, गुलाल और पिचकारी की दुकानों पर देखा जा रहा है। बाजार में पिचकारी 10 से लेकर 400 रुपये, गुलाल 45 से लेकर 60 रुपये, मुखौटे 5 से 50 रूपए में बिक्री हो रही है।
सुगंधित गुलाल की धूम
होली में इस बार बच्चों के लिए डोरीमान, बैनटेन, बटर फ्लाई बच्चों को खूब भा रहे हैं। ये पिचकारियां 15 रुपए से लेकर 500 रुपए तक में उपलब्ध हैं। गुलाल, सैंटेड गुलाल भी ग्राहकों को अपनी ओर खींचने में कामयाब हो रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार इस बार ग्राहक पक्के रंग से दूरी बना रहे हैं। चुनाव के बाद होली होने से भाजपा के कार्यकर्त्ताओं में भी उत्साह दिख रहा है। होली और उत्साहित बनाने में जुटे हैं।
शहर से गांवों तक होलिका दहन की तैयारी
होलिका दहन के लिए सिर्फ तीन दिन बचा है। नगर से लेकर ग्रामीणांचल तक के गली-चौराहे पर जगह-जगह होलिका सजा दी गई हैं। युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ होली की तैयारी की है। कहीं पर बैंड-बाजे का प्रबंध किया गया है तो कहीं पर अन्य व्यवस्था के साथ होलिका दहन करने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस बार होलिका दहन के लिए लकड़ियों का ढेर कम ही देखने को मिल रहा है।
सतर्क रहें, होली का माहौल न बिगाड़ दे रासायनिक रंग
होली को लेकर तो रंगों की दुकानें सज गयी है लेकिन रंगों की गुणवत्ता को लेकर लोगों को हमेशा ध्यान रखना होगा। आजकल बाजारों में ज्यादा मुनाफा के चक्कर घटिया किस्म की भी रंगों की बिक्री की जाती है। उन रंगों से चमऱ रोग व चेहरे पर जलन आदि होने लगती है। ऐसे में रंगों के चुनाव में सावधानी बरतना जरूरी है जिससे रंगों का त्योहार होली हंसी-खुशी बीते। होली पर मिलावटी रंग खुशियों में विधभन डाल सकते हैं। रंगों में रासायनिक तत्वों की मिलावट आंखों में जलन और एलर्जी की समस्या बढ़ा सकती है। इनके आंखों में पड़ने के बाद रगड़ने से घाव हो जाता है। वहीं हरे गुलाल में मिलाए जाने वाले कॅापर सल्फेट के कारण अस्थायी तौर पर नेत्रहीनता की शिकायत हो सकती है। अस्थमा के मरीजों के लिए सूखे और गीले दोनों रंग हानिकारक हैं। नीले गुलाल में मिलाया जाने वाला प्रूशियन ब्लू त्वचा में एलर्जी और संक्रमण पैदा कर सकता है। मिलावटी रंग त्वचा के साथ साथ बालों के लिए भी नुकसानदायक होते हैं। रंग खेलने से पहले अपने को सुरक्षित कर लें।. दूसरों पर रंग की जगह कीचड़ व गोबर न फेंकें। हर्बल रंग व गुलाल का प्रयोग कर सुखद होली खेलें। आंखों को रंगों से बचाने का पूरा प्रयास करें। जलन ज्यादा हो तो नेत्र चिकित्सक को दिखाएं। होली पर नशे से बचेें।