गोंडा। जिले के अधिकतर ग्रामीण घरों में स्नानघर की सुविधा नहीं है। जनगणना के प्रथम चरण में चल रही भवन एवं मकान की गिनती के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं की कमी भी उजागर हो रही है।
जनगणना के दौरान प्रगणक 33 बिंदुओं पर जानकारी जुटा रहे हैं। इनमें घर में स्नानघर की उपलब्धता से जुड़े सवाल पर बड़ी संख्या में परिवारों ने बताया कि उनके घर में स्नानघर नहीं है। प्रगणकों के अनुसार महिलाएं, बच्चे और अन्य लोग खुले में अथवा अस्थायी घास-फूस की ओट बनाकर स्नान करने को मजबूर हैं।
भवन एवं मकान गणना के दौरान पेयजल और जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति भी सामने आ रही है। कई गांवों में अधूरी पेयजल परियोजनाओं के कारण लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। अधिकांश परिवार कम गहराई वाले छोटे हैंडपंपों पर निर्भर हैं।
वहीं घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निकास की समुचित व्यवस्था भी नहीं है। कई स्थानों पर नालियों और नालों से उचित कनेक्शन न होने के कारण गंदा पानी घरों के आसपास ही जमा हो रहा है।
जनगणना के दौरान एक भवन में रहने वाले परिवारों की संख्या को लेकर भी दिलचस्प तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रगणक चूल्हों के आधार पर परिवारों और मकानों की गणना कर रहे हैं। एक ही भवन में जितने अलग-अलग चूल्हे जल रहे हैं, उसी आधार पर परिवारों की संख्या दर्ज की जा रही है। कई लोगों ने आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए भविष्य में परिवार टूटने की आशंका भी जताई।
जिला जनगणना प्रभारी विनीत मिश्र ने बताया कि जिले के लगभग सभी खंडों में जनगणना कार्य शुरू हो चुका है। इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान प्राप्त जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसे किसी अन्य से साझा नहीं किया जाता।