गोंडा। विकास भवन परिसर में कई अहम दस्तावेज को आग के हवाले कर दिया गया। सोमवार की दोपहर में अचानक विकास भवन के कर्मियों ने दो दर्जन से अधिक पत्रावलियां और सरकारी बुकलेट को कैंटीन के पास फूंक दिया। मामले की फोटो वायरल हुई तो अधिकारी बचाव करते दिखे। आग के हवाले किए गए अभिलेखों में प्रधानमंत्री आवास योजना के जांच की फाइल भी थी। जलाए गए अभिलेखों की जानकारी तो विभाग के लोगों ने नहीं दी, लेकिन बताया जा रहा है कि विकास से जुड़े एक अधिकारी के कहने पर अभिलेख फूंके गए हैं। अचानक अभिलेखों के फूंके जाने से कई सवाल उठ रहे हैं। अब अधिकारी फाइलों को जलाने के मामले से इन्कार कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं निष्प्रयोज्य कागज जलाए गए होंगे।
गांवों के विकास व लाभार्थी परक योजनाओं का संचालन विकास भवन से होता है। कई प्रमुख योजनाओं में गडबडियों की शिकायतें भी हैं और कई मामलों में कार्रवाई भी हो रही है। माना जा रहा है कि कुछ ऐसे मामले हैं जिनमें कई बड़े कार्रवाई के दायरे में हैं। इसी बीच अचानक विकास भवन के पीछे बंद कैंटीन के पास विकास भवन के कुछ कर्मियों ने विभाग की फाइलों को लाकर फूंक दिया। जल रही फाइलों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। फोटो में ही दिख रहा है कि एक दर्जन से अधिक फाइलें है जो अभी नई लग रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की फाइलें हैं और उनमें एक फाइल पर प्रधानमंत्री आवास योजना के जांच के लिए बनी कमेटी की पत्रावली लिखा है। इसके अलावा मनरेगा व अन्य योजनाओं की फाइलें जलती दिखीं। जिस समय फाइलों को फूंका गया, उस समय विकास भवन में जिम्मेदार अधिकारी नही थे। फिलहाल चंद घंटों में फाइलें जलकर राख हो गईं।
कहीं जांचों को दबाने के लिए तो नही जलाई गई फाइलें
विकास विभाग में आवास योजना के साथ ही मनरेगा आदि की आधा दर्जन जांच हो रही है। अभी बीते दिनों मुख्य विकास अधिकारी ने कटरा बाजार क्षेत्र में इंटरलॉकिंग निर्माण में अनियमितता पकड़ा है। इसकी भी जांच हो रही है और बड़े स्तर से मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। अचानक फाइलों को आग के हवाले करने के पीछे संभावना जताई जा रही है कि कहीं जांचों को दबाने की साजिश तो नही है।
सरकारी अभिलेखों को नष्ट करने से पहले अनुमति जरूरी
सरकारी अभिलेखों को सुरक्षित रखने का निर्देश समय-समय पर अधिकारी देते रहते हैं। गैर जरूरी अभिलेखों को नष्ट करने से पहले अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है। विभाग के जानकार कहते हैं कि कोई भी फाइल खुलती है तो मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी की अनुमति पर खुलती है। लगभग योजनाओं के निगरानी की जिम्मेदारी भी मुख्य विकास अधिकारी की है, ऐसे में किसी भी फाइल को नष्ट करने से पहले अनुमति जरूरी है।
कराई जाएगी जांच
सरकारी अभिलेख जलाने के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। हो सकता है कि सफाई में कोई रद्दी कागज जलाया गया हो। सफाई हो रही है। अगर कोई बात ऐसी सामने आती है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी। -आशीष कुमार, सीडीओ