गोंडा। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने शुक्रवार को गोंडा के एलबीएस पीजी कॉलेज में महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक की। कहा कि भारतीय धर्म संस्कृति का जो महिमा मंडन हमारे ऋषियों ने किया है, उसके इतर मां पाटेश्वरी देवी विश्वविद्यालय में कुछ भी नहीं पढ़ाया जाएगा। जिन्होंने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुंचाया। ऐसे किसी भी विदेशी आक्रांता को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा। हमारा फोकस सिर्फ भारतीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं पर रहेगा।
कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में मौजूदा समय 10 फैकल्टी संचालित की जा रही हैं। मंडल की आवश्यकता के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। कार्य परिषद व समितियों का गठन किया जा चुका है। आगामी 23 जून को गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती के संबद्ध महाविद्यालयों में शोध प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है।
कुलपति ने बताया कि क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए टूरिज्म सहित अन्य कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद इन कोर्स की मांग तेजी से बढ़ी है। ऐसे में विश्वविद्यालय इस दिशा में छात्रों को रोजगारोन्मुख शिक्षा देने का कार्य करेगा। साथ ही नए शैक्षिक सत्र को लेकर जागरूकता कार्यक्रम में जानकारी दी गई। इस मौके पर कुलसचिव परमानंद सिंह, प्राचार्य प्रो. रवींद्र कुमार, नैक समन्वयक प्रो. जितेंद्र सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
श्रावस्ती को इंटरनेशनल लैंग्वेज हब बनाने की तैयारी
कुलपति ने बताया कि श्रावस्ती क्षेत्र प्राचीनकाल में बौद्ध और जैन शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय विदेशी भाषाओं का विभाग (फॉरेन इंटरनेशनल लैंग्वेज डिपार्टमेंट) खोलने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही वाराणसी के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय से भी एमओयू प्रक्रिया में है। श्रावस्ती को इंटरनेशनल लैंग्वेज हब के रूप में विकसित किया जाएगा।