गोंडा। उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में 21.47 करोड़ रुपये का घोटाला ऐसे ही नहीं हुआ। वर्ष 2021-2025 के बीच तत्कालीन बैंक प्रबंधकों ने दलालों के सांठगांठ करके 602 लोगों को 86 करोड़ रुपये के ऋण बांटे थे। ऑडिट रिपोर्ट के हर एक पन्ने में पुलिस को ऋण के खेल में नए-नए किरदार मिल रहे हैं।
बैंक घोटाले मामले में 12 जनवरी को नगर कोतवाली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में तीन शाखा प्रबंधकों व सहायक कैशियर के साथ ही 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ आरोपियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नगर कोतवाली के अपराध निरीक्षक व विवेचक सभाजीत सिंह का कहना है कि अभी तक की जांच में चार साल के भीतर बैंक ने कुल 602 ऋण की मंजूरी दी। इसमें 86 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। एक-एक खाते की पड़ताल की जा रही है। ऑडिट रिपोर्ट को खंगालने पर घोटाले में नए-नए लोगों की भूमिका सामने आ रही है। इसलिए आरोपियों की संख्या भी बढ़ेगी।
संपत्ति के नाम पर दिए 58 करोड़ के ऋण
यूपी कोऑपरेटिव बैंक में संपत्ति के नाम पर भी ऋण का बड़ा खेल हुआ है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच बैंक ने अपने चाहने वालों के लिए दिल खोलकर धन की वर्षा की। संपत्ति के नाम पर 58 करोड़ का ऋण बांटा गया। इस ऋण का 250 खातों में लेनदेन किया गया। इसमें न तो आवेदकों का सही तरह से सत्यापन कराया गया और न ही जिस संपत्ति को आधार बनाकर ऋण की मंजूरी दी गई, उसे ही देखा गया कि मौके पर वह है भी या नहीं। कई ऋण के अभिलेखों को खंगालने के बाद पुलिस ने मौके का सत्यापन कराया तो जिस संपत्ति पर ऋण की मंजूरी दी गई। वह मौके पर दूसरों के नाम दर्ज पाई गई। दलालों की सक्रियता से ऋण की मंजूरी के साक्ष्य भी जांच में मिल रहे हैं। ऑडिट रिपोर्ट पर पुलिस के मंथन में कई नए मामले सामने आ रहे हैं।
शाखा प्रबंधकों के दलालों पर भी नजर
यूपी कोऑपरेटिव बैंक में घोटाला ऐसे ही नहीं हुआ। शाखा प्रबंधक के दलालों का बड़ा रैकेट इसमें शामिल है। दूसरों की जमीन का कूटरचित बैनामा तैयार करके दलालों ने शाखा प्रबंधकों से मिलीभगत करके बैंक राजस्व को तो चूना लगाया ही, जिसने ऋण का आवेदन तक नहीं किया, उसके नाम से भी ऋण निकाल लिया। हालांकि पुलिस ने अभी दलालों के नाम उजागर नहीं किए हैं।