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वकीलों ने दूसरे दिन भी किया प्रदर्शन, न्यायिक कार्य ठप

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गोंडा में दीवानी कचहरी गेट के सामने सड़क पर प्रदर्शन करते अधिवक्ता। - फोटो : GONDA
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गोंडा। तहसील स्तर पर ग्राम न्यायालय /मुंसिफ न्यायालय स्थापना के विरोध में बुधवार को दूसरे दिन भी वकीलों का प्रदर्शन जारी रहा। बुधवार को पूर्णताला बंदी होने के कारण रजिस्ट्री तक नहीं हो पायी। यहां तक वेंडरों ने एक भी स्टांप की बिक्री नहीं की। इससे सरकार को करीब 30 लाख रुपये राजस्व का नुकसान हुआ। दीवानी कचहरी गेट के सामने चल रहे धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता संयुक्त बार एसोसिएशन अध्यक्ष दीनानाथ त्रिपाठी व वीरेंद्र त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का संचालन सिविल बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप पांडेय ने किया।
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वकीलों ने कलमबंद हड़ताल कर दीवानी कचहरी के सामने सड़क पर जमा होकर नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन किया। अपने अधिकारों के लिए लामबंद हुये अधिवक्ताओं ने दीवानी कचहरी से लेकर तहसील व कलेक्ट्रेट परिसर में बने न्यायिक कार्यालयों पर तालाबंदी कराई। वहीं रजिस्ट्री ऑफिस भी बंद रहा। वकीलों की हड़ताल के चलते बुधवार को करीब 30 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। प्रदर्शन सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष दीनानाथ त्रिपाठी ने कहा कि मंगलवार के प्रदर्शन की सफलता को देखते हुए आज वकीलों की संख्या अधिक रही। हमारी मांगों पर सरकार द्वारा विचार न किए जाने तक अधिवक्ताओं का प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता गोकरननाथ पांडेय ने कहा कि सरकार को अधिवक्ता हितों की अनदेखी करना महंगा पड़ेगा। गनेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार व न्यायिक अधिकारियों के हिटलरशाही के चलते अधिवक्ताओं का शोषण हो रहा है। ग्राम न्यायालय बनने से वादकारियों को परेशानी तथा दबंगों को फायदा मिलेगा। प्रदर्शन में रविचंद्र त्रिपाठी, राम कृपाल शुक्ल, उपेंद्र मिश्र, माधवराज मिश्र विन्देश्वरी दुबे, अरविंद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
बंद रहा रजिस्ट्री ऑफिस, 30 लाख का हुआ राजस्व नुकसान
वकीलों के कलमबंद हड़ताल के चलते बुधवार को रजिस्ट्री ऑफिस समेत कलेक्ट्रेड व तहसील परिसर के सभी न्यायिक संबंधित कार्यालयों में ताले लटके रहे। सदर तहसील में रजिस्ट्री फीस व स्टांप शुल्क के रुप मे प्रतिदिन करीब 25 लाख रुपये का राजस्व मिलता है। वहीं 5 लाख रुपये तक की टिकट बिक्री हो जाती है। वकीलों के हड़ताल के कारण प्रतिदिन 30 लाख रुपये तक का राजस्व नुकसान हो रहा है।
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