गोंडा। अयोध्या विकास के लिए शासन ने जिले की सीमा पर 800 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन से आख्या सहित प्रस्ताव मांगा था। प्रशासन ने सरयू नदी के इस पार दो गांवों में 860 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर शासन को भेज दिया है। इससे पर्यटन विकास के साथ भगवान राम की जन्मस्थली से गोंडा जुड़ जाएगा और यहां के लोगों के तरक्की का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
त्रेता युग में भगवान श्रीराम के गोचारण की भूमि रही गोनर्द (अब गोंडा) की धरती पर भगवान राम से जुड़े आध्यात्मिक स्थल के साथ पर्यटन का विकास होगा। सरयू नदी के इस पार गोंडा व उस पार अयोध्या है। सरयू के दूसरे छोर से अयोध्या की खूबसूरती व पावन सलिला सरयू की कल-कल ध्वनि सुनाई देती है।
मंदिर के घंटे घरियार भी बजते हैं तो गोंडा की भूमि उसकी गवाह बनती रही है। बीते 29 अक्टूबर को भगवान राम की भव्य प्रतिमा सहित पर्यटन विकास के लिए शासन ने 800 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव आख्या सहित मांगा था।
प्रशासन ने तरबगंज तहसील के सरयू के कछार पर बसी ग्राम पंचायत दुर्गागंज माझा व महेशपुर में 860 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर शासन को आख्या भेज दी है। दुर्गागंज माझा में 698.710 हेक्टेयर तथा महेशपुर में 161.759 हेक्टेयर जमीन का चिह्नांकन कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
यह चिह्नित भूमि सरयू व टेढ़ी नदी के दो पुलों के मध्य स्थित है। इसमें नवीन परती, बंजर, रेता, ग्राम समाज, बंधा व जलमग्न भूमि शामिल है। राजस्व निरीक्षक विवेक सिंह ने बताया कि इसमें कुछ भूमि श्रेणी छह की है। लेकिन पूरा ब्योरा शासन को भेज दिया गया है।
अयोध्या में सरयू के इस पार चिह्नित भूमि पर अयोध्या के पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण के अंतर्गत भगवान राम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रेटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, भगवान राम की प्रतिमा, लैंड स्केपिक व पर्यटक सुविधाओं का विकास कराया जाना है।
संयुक्त सचिव उत्तर प्रदेश शासन एपी सिंह ने बीते 29 अक्टूबर को गोंडा के डीएम को पत्र भेजकर जमीन उपलब्ध कराने के लिए आख्या व प्रस्ताव मांगा था।
पर्यटन विकास से होगा रोजगार सृजन
अयोध्या में जन्मे भगवान राम एवं उनके पूर्वजों के गायों के लिए गोंडा की भूमि पर उनका चारण होता था। अयोध्या के पावन सलिला सरयू के इस पार पर्यटन का विकास होने पर अयोध्या के साथ गोंडा वासियों के दिन बहुरेंगे। लोगों को रोजगार मिलने के साथ क्षेत्र का विकास होगा और व्यवसाय को तरक्की के पंख लगेंगे। इसका सीधी फायदा जिले के राजस्व को भी होगा।
ऋषियों की जन्म भूमि से जुड़ जाएगी अयोध्या
गोंडा जिला ऋषियों की भूमि रही है। महर्षि पतंजलि, महर्षि च्यवनमुनि, नचिकेता, रामचरित मानस के प्रणेता गोस्वामी तुलसीदास, भगवान घनश्याम की जन्मस्थली स्वामी नरायन छपिया, महाभारत काल में स्थापित पृथ्वीनाथ शिवमंदिर, वाराही देवी सहित तमाम ऋषि परंपराओं को यह पर्यटन स्थल आगे बढ़ाने का काम करेगा।
शासन के पत्र आते ही दो ग्राम पंचायतों में स्थित 860.469 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर आख्या भेज दी गई है। इसमें दुर्गागंज माझा व महेशपुर गांव की जमीनें हैं।
-राजेश कुमार, एसडीएम तरबगंज