बालपुर (गोंडा)। धनई पट्टी नहर 16.5 किलोमीटर बनकर तैयार हो गयी है। मगर 1.5 किलोमीटर नहर की किसानों के विरोध के चलते अभी खोदाई नहीं हुई है। जिससे 20 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का संकट बना हुआ है। 18 साल से लाखों किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। नहर विभाग ने विरोध कर रहे नौ किसानों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है।
धनई पट्टी माइनर खोदाई का मामला मात्र 1.5 किलोमीटर पर किसानों से मुआवजा को लेकर विवाद होने के कारण 18 साल से लटका है। इससे 20 हजार हेक्टेयर खेत पर सिंचाई का संकट है। जबकि वर्ष 2002 में 16.5 किलोमीटर नहर की खोदाई का काम पूरा हो चुका है। इस नहर से निकलने वाली माइनर 56 किलोमीटर भी बनकर तैयार है। नहर की खोदाई केवल 570 मीटर परसा गोडरी में और करीब 1100 मीटर धानी, धनखर, ठकुरापुर में बाकी है। जिसकी खोदाई का किसान 18 साल से विरोध कर रहे हैं।
वर्ष 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने प्रति बीघा 76 हजार रुपये मुआवजा तथा 10 हजार रुपये पुनर्वास देने के लिए नोटिस जारी किया था। किसानों ने बिना सूचना दिये भूमि अधिग्रहण करने के विरोध में नोटिस लेने से इनकार कर दिया था। वर्ष 2011 से ही जिलाधिकारी के खाते में 83 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से एफडी के रूप में जमा हैं।
किसान वर्ष 2019 के सर्किल रेट मुआवजा की मांग कर रहे हैं। नहर विभाग ने खोदाई का विरोध कर रहे परसा गोडरी के नौ किसानों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। मात्र एक दर्जन किसान विरोध कर रहे हैं, जबकि लाखों किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं। उपजिलाधिकारी करनैलगंज ज्ञानचंद्र गुप्ता के अनुसार नहर का विरोध कर रहे किसानों की मांग नाजायज है। एक ही नहर खोदाई में दो तरह से मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। जल्द ही खोदाई का काम पूरा कराके किसानों को पानी दिया जायेगा।