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अब 100 दिन में 21,300 मजदूरी पाएंगे मनरेगा श्रमिक

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गोंडा। मनरेगा में कार्य करने वाले श्रमिकों को अब बढ़ी हुई मजदूरी का भुगतान होगा। अभी तक प्रतिदिन 204 रुपये का भुगतान होता है, जिससे साल में सौ दिन के काम पर 20,400 रुपये ही मिल सकते थे। अब प्रतिदिन की मजदूरी 213 रुपये निर्धारित कर दी गई है। ऐसे में साल में अब 21,300 रुपये की मजदूरी मिल सकेगी। जिले में दो लाख मनरेगा श्रमिक पंजीकृत हैं। नौ रुपये मजदूरी बढ़ने से पंचायतों के कामों में तेजी आने की उम्मीद है। वैसे मजदूरों की मानें तो अभी भी मनरेगा की मजदूरी बाजार से काफी कम है। श्रमिकों का कहना है कि चार सौ रुपये मजदूरी होनी चाहिए। फिलहाल केंद्र सरकार की स्वीकृति से मनरेगा में मजदूरी तय होती है।
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जिले में मनरेगा से श्रमिकों को रोजगार देने की योजना का प्रस्ताव शासन को मार्च में ही भेजा जा चुका है। जिसमें 72 लाख 1257 मानव दिवस कार्य होने हैं। जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया जा सके। अब प्रस्ताव की स्वीकृति केंद्र सरकार से होने के बाद बजट के आधार पर कार्य शुरू होगा। इसके अलावा अभी कार्य हो भी रहे हैं। नए कार्य स्वीकृति के बाद तेजी से होने हैं। अब श्रमिकों की मजदूरी बढ़ने से बजट में बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। माना जा रहा है कि श्रमिकों को लाभ तो होगा ही, लेकिन परियोजनाओं की लागत बढ़ जाएगी। विभाग को मनरेगा से भेजे गए प्रस्तावों पर केंद्र सरकार से हरी झंडी का इंतजार है। नए वित्तीय वर्ष में श्रमिकों की मजदूरी तय होने के बाद अब प्रस्तावों पर जल्द ही स्वीकृति होने की उम्मीद है। इससे मनरेगा श्रमिकों को बढ़ी मजदूरी का भुगतान होगा। (संवाद)
ग्राम पंचायतें ही सृजित करेंगी 50.40 लाख मानव दिवस
मनरेगा से सबसे अधिक मानव दिवस पंचायतें ही सृजित करेंगी। जिससे अपने ही गांव में श्रमिकों को रोजगार मिल सके। इसमें पंचायतें 50 लाख 40 हजार 880 मानव दिवस सृजित करेंगी। इसके लिए पंचायतों में अधिक से अधिक कच्चे कार्यों पर जोर दिया जाएगा। जिससे मानव दिवस अधिक से अधिक सृजित हो सकें। इस बार कृषि से जुड़े कार्य प्राथमिकता से कराए जाने हैं। वहीं, क्षेत्र पंचायतें 10 लाख 80 हजार 189 मानव दिवस सृजित करेंगी। जिला पंचायत भी तीन लाख 60 हजार 63 मानव दिवस सृजित करेंगी। अन्य विभागों को सात लाख 20 हजार 126 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य दिया गया है। जिससे जिले के अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल सके।
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लॉकडाउन में शहरों से लौटे श्रमिकों को रोजगार देने पर जोर
कोरोना संकट के दौरान बीते दो साल में दूसरे प्रदेशों में कार्य करने वाले लोग भी वापस आ गए थे। दो साल में 60 हजार के करीब श्रमिक वापस लौटे थे। बीते सालों में इसमें से तीस हजार से अधिक श्रमिकों को मनरेगा से जोड़कर रोजगार देने का अभियान शुरू हुआ था। इसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार भी मिला था। कोरोना संकट कम होने के बाद भी अभी बीस हजार के करीब श्रमिक वापस नहीं जा सके हैं। इन श्रमिकों को भी मनरेगा से रोजगार देने की तैयारी है। जिससे श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट न हो सके।
मनरेगा में श्रमिकों की मजदूरी नौ रुपये बढ़ी है। नए सत्र में कई परियोजनाएं शुरू की जानी हैं। जिससे श्रमिकों को अधिक से अधिक रोजगार दिया जा सके। शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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