पसका (गोंडा)। मन में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। त्याग, लगन व परिश्रम से सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह कर दिखाया परसपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सेमरी निवासी ज्योति पांडेय ने। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर खुद मुकाम हासिल किया। साथ ही दो हजार महिलाओं के रोजगार का जरिया बन महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश की है।
एमए व एमएड तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद ज्योति ने नौकरी को प्राथमिकता न देते हुए रोजगार करने का फैसला लिया। उन्होंने बंगलूरू जाकर कामकाजी महिलाओं के बारे में जानकारी ली। वर्ष 2018 में गांव की 10 महिलाओं को जोड़कर सबसे 50-50 रुपये इकट्ठा करके रुई से फूलबत्ती बनाने का काम शुरू किया। पैकिंग कर बाजार में बिक्री शुरू की गई। उनकी रंग-बिरंगी फूलबत्ती की धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी। फिर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर जय बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह व शगुन आजीविका ग्राम संगठन समूह बनाया। वर्तमान समय में फूलबत्ती के साथ ही गरम मसाला की पैकिंग कर बाजार में बेचा जा रहा है। पहले खड़ा मसाला लेकर कूट-पीसकर गरम मसाला तैयार किया जाता है। फिर पैकेजिंग के साथ गरम मसाला बाजार में बेचा जाता है। गरम मसाले की पैकिंग का काम परसपुर व धानेपुर विकासखंड की दो हजार से अधिक महिलाएं कर रही हैं। जिन्हें पैकेजिंग का मेहनताना मिलता है। ज्योति का समूह पापड़, अचार, अगरबत्ती, फूलबत्ती, सॉफ्ट वेज मक्के के लड्डू, सेनेटरी पैड आदि भी तैयार करता है। इससे समूह को प्रतिवर्ष करीब आठ लाख रुपये की कमाई होती है।
पंजाब और हरियाणा की महिलाओं को भी दे चुकीं प्रशिक्षण
ज्योति को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में बतौर प्रशिक्षक तैनात किया गया है। जहां वह अन्य महिलाओं को गरम मसाला बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। वह पंजाब और हरियाणा जाकर भी महिलाओं को 25 से अधिक तरह के गरम मसाले बनाने व पैकेजिंग की ट्रेनिंग दे चुकी हैं।